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रामपुर साइबर धोखाधड़ी: दारोगा का बेटा फर्जी बैंक खातों के गिरोह में शामिल, करोड़ों के घोटाले के बाद हुआ पर्दाफाश

Published: Sun, 20 Sep 2026 09:30 PM (IST)

रामपुर में साइबर धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार चार लोगों में से एक, बरेली का आशुतोष, दारोगा का बेटा निकला।

साइबर गिरोह के साथ पकड़ा बरेली का आशुतोष निकला दारोगा का बेटा।

साइबर गिरोह के साथ पकड़ा बरेली का आशुतोष निकला दारोगा का बेटा।

HighLights

  1. आशुतोष दारोगा का बेटा, फर्जी बैंक खाते खोलने में गिरफ्तार।

  2. गिरोह ने साइबर अपराधियों के दो करोड़ रुपये खपाए।

  3. अमन खान फरार, आधार से फर्जी खाते खुलवाते थे।

जागरा संवाददाता, रामपुर। साइबर अपराधियों के लिए फर्जी बैंक खाते खोलने के आरोप में गिरफ्तार चार आरोपितों में बरेली का आशुतोष दारोगा का बेटा निकला। उसके पिता उत्तर प्रदेश पुलिस में उप निरीक्षक हैं और वर्तमान में पीलीभीत में तैनात हैं। वह एमबीए है। गिरोह का फरार आरोपित अमन खान उसका दोस्त है।

अमन खां मिलक कोतवाली के रेवड़ी खुर्द गांव का रहने वाला है। दोनों की दोस्ती ऑनलाइन गेम खेलने के दौरान हुई। अमन ही टेलीग्राम पर वेबसाइट के जरिए साइबर अपराधियों से जुड़ा था।

इसके बाद दोनों ने हिमांचल के मनाली में माल रोड पर दिल्ली दरबार के नाम से पाटर्नरशिप में होटल भी खोला। पुलिस के मुताबिक करीब एक साल से वे लोग साइबर अपराधियों के लिए काम कर रहे थे। इस गिरोह का दूसरा सक्रिय सदस्य अजय भी मिलक के किरा गांव का है, जो अमन के पड़ोस में है। इसके चलते अमन की अजय से भी जान पहचान थी।

अजय डाक कर्मी मनीष और जन सेवा केंद्र संचालक अनीस के जरिए उनके पास आधार कार्ड बनवाने आने वालों लोगों के धोखे से बैंक एकाउंट बनाने के लिए अंगूठा और फोटो लेते थे। अनीस का जनसेवा केंद्र अमन के गांव में ही है। एक बैंक एकाउंट के बदले मनीष और अनीस को 500 रुपये दिए जाते थे।

इन बैंक एकाउंट को एक्टिवेट करने के लिए फर्जी सिम की व्यवस्था अजय करता था। इसके लिए वह गरीब लोगों को पकड़ा था। उन्हें एक हजार रुपये देकर उनके नाम से सिम निकलवा लेता था। उन मोबाइल सिमों को धोखाधड़ी से खोले गए बैंक खातों में इस्तेमाल किया जाता था, ताकि खाते का पूरा एक्सिस इनके हाथ में रहे और खाता खुलवाने वालों को इसकी जानकारी न हो सके।

इन बैंक खातों में अमन साइबर अपराधियों द्वारा फ्राड की रकम को मंगाता था। इस रकम को अजय द्वारा खाते से विड्राल कर लिया जाता था। बाद में अमन एक दूसरा खाता देता था। रकम उस खाते में भेजकर यूएसटीडी के जरिए साइबर अपराधियों को भेज दिया जाता था।

मुकदमे की विवेचना कर रहे साइबर क्राइम थाना प्रभारी संजय कुमार ने बताया कि अब तक साइबर फ्राड के जरिए दो करोड़ रुपये की रकम बैंक खातों में खपाए जाने का अनुमान है। फरार आरोपित अमन खान की तलाश की जा रही है।