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पुलिस के फर्जी गुडवर्क की खुली पोल: लापता घोड़ा लौटाने वाले युवकों को बनाया चोर, SP ने बिठाई जांच

Published: Sun, 23 Aug 2026 11:23 PM (IST)

भोट पुलिस पर फर्जी गुडवर्क के चक्कर में लापता घोड़ा लौटाने वाले दो युवकों को चोर बनाने का आरोप लगा ...और पढ़ें

एआई जेनरेटेड इमेज है।

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HighLights

  1. घोड़ा स्वामी बोला, पुलिस उनके घर से ले जाकर पीड़ित के घर बांध आई घोड़ा

संवाद सहयोगी, बिलासपुर (रामपुर)। पहले तो पुलिस ने दो दिन तक घोड़ा चोरी होने की प्राथमिकी दर्ज नहीं की। घोड़ा वापस मिलने की सूचना पर पुलिस को फर्जी गुडवर्क करने की ललक जगी। घोड़ा स्वामी को थाने बुलाकर जबर्दस्ती तहरीर लिखवाई। उसके घर से घोड़ा ले जाकर पुलिस उसी के घर बांध आई जिसने घोड़ा लौटाया था।

फिर घोड़ा की बरामदगी की पटकथा लिखकर उसे लौटाने वाले दोनों पीड़ितों की गिरफ्तारी दिखाकर जेल भेज दिया। पुलिस का पूरा ड्रामा सीसीटीवी फुटेज में भी कैद हुआ है। एसपी ने प्रकरण की जांच के आदेश दिए हैं।

भोट के रहने वाले जुल्फिकार ने एसपी को दिए शिकायतीपत्र में बताया कि 16 अगस्त की देर शाम रस्सी तोड़कर उनका घोड़ा घर से लापता हो गया। 17 अगस्त की सुबह उन्होंने भोट थाने में घोड़े के चोरी होने की तहरीर दी।

पुलिस ने बिना किसी कार्रवाई के उन्हें थाने से टरका दिया। उसी दिन शाम को मनकरा के ग्राम प्रधान प्रतिनिधि मुहम्मद रियाज ने उन्हें फोन कर सूचना दी कि उनका घोड़ा भटकता हुआ उनके गांव के पास आ गया था।

गांव के दो युवक सोनू वाल्मीकि और सुभाष वाल्मीकि उसे घर ले आए थे। कहा कि वह यहां आकर अपना घोड़ा ले जाएं। जुल्फिकार रात को ही सुभाष वाल्मीकि के घर पहुंच गए। मगर तेज बारिश के कारण घोड़ा सुबह अपने साथ ले जाने की बात कहकर लौट गए।

अगले दिन, यानि कि, 18 अगस्त की सुबह जुल्फिकार दोबारा सुभाष के घर पहुंचे और घोड़ा वापस ले गए। इसकी भनक लगने पर उसी शाम को पुलिस ने घोड़ा मालिक जुल्फिकार को थाने बुलाया। आरोप है कि यहां उससे सादे कागज पर पुलिस ने अंगूठा लगवा लिया।

इसके बाद रात 11.40 बजे पुलिस ने सोनू वाल्मीकि और सुभाष वाल्मीकि के विरुद्ध चोरी की प्राथमिकी दर्ज कर ली। रात को ही पुलिस ने दोनों युवकों और इनके स्वजन को थाने बुलाकर उन्हें हवालात में बंद कर दिया।

19 अगस्त की सुबह पुलिस घोड़ा मालिक जुल्फिकार के घर पहुंची और वहां से घोड़ा लेकर चलने को कहा। पुलिस की सरकारी जीप आगे-आगे चलती रही और दो कांस्टेबल घोड़ा लेकर पीछे-पीछे चले।

सुबह लगभग 10 बजे पुलिस ने घोड़े को दोबारा सुभाष के घर पहुंचाया, जोकि सीसीटीवी कैमरों में भी कैद हो गया। इसके बाद पुलिस ने लगभग 12 बजे यहां से चोरी का घोड़ा बरामद दिखाकर दोनों युवकों को माल बरामदगी का दावा करते हुए जेल भेज दिया।

जब दोनों जेल चले गए तो जुल्फिकार को इसका अहसास हुआ कि पुलिस ने फर्जी मुकदमा दर्ज कर दोनों निर्दोष युवकों को जेल भेजा है। आरोपित थानाध्यक्ष अर्जुन त्यागी का कहना है कि दोनों युवकों ने घोड़ा चोरी किया था।

वीडियो में वह बाइक पर घोड़ा अपने साथ ले जाते हुए देखे गए। इसके एवज में उनके विरुद्ध चोरी की प्राथमिकी दर्ज करते हुए दोनों का चालान कर दिया गया है। सीओ बिलासपुर हर्षिता सिंह का कहना है कि जांच उपरांत उच्च अधिकारियों के निर्देशानुसार अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।

पिता बोला, छोड़ने के मांगे थे एक लाख रुपये

निदोर्ष जेल गए सुभाष के पिता ओम प्रकाश का आरोप है कि पुलिस ने थाने बुलाया था। इस पर वह खुद बेटे को लेकर थाने गए थे। वहां पुलिस ने बताया कि बेटे को जेल भेजेंगे वरना एक लाख रुपये दे दो। सुभाष का आरोप है कि रुपये देने में जब उसने असमर्थता जताई तो पुलिस ने उसके खिलाफ लिखापढ़ी कर दी।

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