मुस्लेमीन, रामपुर। आजादी से पहले रामपुर में नवाबों का राज था। उनकी अपनी फौज थी, अपना रेलवे स्टेशन, अपना बिजलीघर, अपनी अदालतें, यानी सब कुछ अपना था। देश 1947 में आजाद हो गया, लेकिन रामपुर के नवाब दो साल बाद तक राज करते रहे। रामपुर में 1774 से 1949 तक नवाबों का राज रहा। नवाब फैजुल्ला खां पहले और रजा अली खां आखिरी नवाब थे। फैजुल्ला खान 1774 में रामपुर नवाब बने। इनके बाद मुहम्मद अली खान, गुलाम मुहम्मद खान, अहमद अली खान, मुहम्मद सैद खान, यूसुफ अली खान, कल्ब अली खान, मुहम्मद मुस्ताक अली खान, हामिद अली खान और रजा अली खान नवाब रहे।

जब बच्चे पैदा होते तब तोप के गोले दागे जाते थे : रामपुर के नवाब की देशभर के राजघरानों में भी बड़ी अहमियत थी। वह जब बाहर जाते तो उन्हें दूसरे राज्यो में 15 तोपों की सलामी दी जाती थी। नवाब खानदान में जब बच्चे पैदा होते तब भी तोप के गोले दागे जाते थे। बेटा पैदा होने पर 21 और बेटी पैदा होने पर 11 गोले दागे जाते थे, इसी से जनता को पता लगता था कि नवाब खानदान में खुशी हुई है। नवाबों की बेशुमार दौलत थी, जिसका अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बंटवारा हो रहा है। नवाब खानदान की संपत्ति 1073 एकड़ में फैली है। कोठी खासबाग का इलाका ही इतना बड़ा है कि इसमें एक और शहर बस सकता है।

कोठी का निर्माण 1930 में नवाब हामिद अली खां ने कराया था : कोठी खासबाग और किला नवाबों की शान रहा है। अकेली कोठी खासबाग का एरिया 450 एकड़ है और सिविल लाइंस क्षेत्र में है। यह देश की पहली फुल्ली एयर कंडीशनर कोठी है। इसमें ढाई सौ कमरे और सिनेमा हाल समेत कई बड़े हाल हैं। इस कोठी का निर्माण 1930 में नवाब हामिद अली खां ने कराया था। कोसी नदी किनारे बनी इस कोठी के चारों ओर बाग हैं, जिसमें एक लाख से ज्यादा पेड़ लगे हैं। यूरोपीय इस्लामी शैली में बनी इस कोठी में नवाब का आफिस, सेंट्रल हाल, सिनेमा हाल व संगीत हाल भी बना है। सेंट्रल हाल में बेशकीमती पेंटिंग लगी हैं। कोठी के मुख्य द्वार पर गुंबद बने हैं, जो इसकी खूबसूरती में चार चांद लगा रहे हैं। इसकी सीढ़ियां इटेलियन संगमरमर से बनी हैं। इसके बड़े बडे़ हाल बर्माटीक और बेल्जियम ग्लास के झूमरों से सजाए गए हैं।

देश की पहली फुल्ली एयरकंडीशनर कोठी: नवाब जुल्फिकार अली खां उर्फ मिक्की मियां की पत्नी पूर्व सांसद बेगम नूरबानो बताती हैं कि यह देश की पहली फुल्ली एयरकंडीशनर कोठी है। कोठी में बर्फखाना बनाया गया, इसमें लोहे के फ्रेम में बर्फ की सिल्ली रखी रहतीं हैं। इनके पास में दो मीटर से भी बड़े साइज के पंखे लगे थे। पंखे को चलाने के लिए 150 हार्सपावर की बिजली मोटर लगाई। पंखे की हवा बहुत तेज निकलती थी, जो बर्फ की सिल्लियों से होकर कोठी के कमरों में जाती। कमरों तक हवा पहुंचाने के लिए पूरी कोठी के नीचे दो गुणा दो फीट की पक्की नाली बनाई गई। इस सेंट्रल नाली से कमरों के लिए छोटी-छोटी नालियां बनाई गईं। इन नालियों के मुंह पर फ्रेम लगाए गए, इनसे जरूरत के मुताबिक ही हवा निकलती थी। इस सिस्टम की देखरेख के लिए इंजीनियरों की पूरी टीम थी, लेकिन अब यह सिस्टम जंक खाकर बर्बाद हो चुका है। कोठी खासबाग के अलावा शाहबाद में लक्खी बाग, बेनजीर बाग और नवाब रेलवे स्टेशन, कुंडा आदि शामिल हैं। 

बड़ा बेटा होता था हकदार : सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले सारी संपत्ति पर स्वर्गीय नवाब मुर्जता अली खां के बेटे मुराद मियां व बेटी निगहत आब्दी ही काबिज थे। दरअसल राजपरंपरा के मुताबिक बड़ा बेटा ही नवाब की सारी संपत्ति का हकदार होता था। नवाबी खत्म होने पर खानदान के दूसरे सदस्यों ने बंटवारा राजपरंपरा के बजाय शरीयत के हिसाब से करने की मांग करते हुए 1972 में कोर्ट में मुकदमा दायर किया। पांच माह पहले सुप्रीम कोर्ट ने शरीयत के हिसाब से ही बंटवारा करने के आदेश दिए। पूर्व जिला शासकीय अधिवक्ता हर्ष गुप्ता कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने बंटवारे की जिम्मेदारी जिला जज को सौंपी है और उन्हे यह काम दिसंबर 2020 तक पूरा कराना है। इसके लिए जिला जज ने चल और अचल संपत्ति के सर्वे व मूल्यांकन के लिए अलग-अलग एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किए हैं।

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Posted By: Sanjay Pokhriyal

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