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कमर के असहनीय दर्द ने बिस्तर पर पहुंचाया, फिर एक सलाह ने बदल दी मधुबाला की जिंदगी

Published: Thu, 03 Sep 2026 10:05 PM (GMT+05:30)

कमर दर्द से बिस्तर पर पहुंची मधुबाला गुगलानी योग से ठीक होकर दूसरों को निःशुल्क योग सिखाने लगीं। रामपुर में ...और पढ़ें

बिलासपुर में मधुबाला योग गुरु के आवास पर योग करती महिलाएं। जागरण

बिलासपुर में मधुबाला योग गुरु के आवास पर योग करती महिलाएं। जागरण

HighLights

  1. खुद योग से मिली जिंदगी की नई राह, अब 10 साल दूसरों को बांट रहीं सेहत का उजाला

  2. कमर की चोट से बदली जिंदगी, अब 40 महिलाओं को दे रहीं स्वस्थ जीवन की राह

राधेश्याम, रामपुर। मधुबाला गुगलानी को वर्ष 2016 में कमर की चोट ने को बिस्तर पर पहुंचा दिया था। कमर में असहनीय दर्द था, बिस्तर से उठना मुश्किल हो गया था। लगातार लेटे-लेटे थक चुकी थीं। तभी किसी ने आयुर्वेद चिकित्सक पीएन मेहरा के पास जाने की सलाह दी। यही सलाह उनकी जिंदगी का ऐसा मोड़ बनी, जिसने उन्हें योग की राह पर ला दिया।

उपचार के साथ योग और प्राणायाम शुरू किया तो एक महीने में कमर से बेल्ट उतर गई। दर्द कम हुआ तो मन में एक विचार आया कि जब योग ने मुझे स्वस्थ किया है तो क्यों न इसका लाभ दूसरों तक भी पहुंचाया जाए।

इसके बाद शुरू हुआ बिलासपुर की रहने वाली मधुबाला गुगलानी का योग और सेवा का सफर, जो दस साल बाद भी अनवरत जारी है। योग सिखाने के बदले उन्होंने कभी किसी से कोई शुल्क नहीं लिया।

योग और प्राणायाम से स्वास्थ्य लाभ मिलने के बाद उन्होंने इसे जीवन का उद्देश्य बना लिया। उनका कहना है कि कमर का दर्द उनके लिए परेशानी जरूर था, लेकिन उसी दर्द ने उन्हें दूसरों का दर्द समझने और दूर करने की राह दिखाई।

उन्होंने वर्ष 2017 में योग का प्रशिक्षण लिया। वर्ष 2018 में पंजाबी कालोनी मंदिर से निशुल्क योग कक्षा शुरू की। शुरुआत महज दो-चार लोगों से हुई, लेकिन धीरे-धीरे संख्या बढ़ती गई और करीब 40 महिलाएं नियमित रूप से जुड़ गईं।

वर्ष 2019 में उन्होंने योग शिविरों के जरिये घर-घर योग पहुंचाना शुरू किया। योग सिखाने के बदले उन्होंने कभी शुल्क नहीं लिया। उनका मानना था कि परमात्मा ने उन्हें स्वस्थ होने का अवसर दिया है तो अब दूसरों की सेवा करना उनका दायित्व है।

योग गुरु स्वामी रामदेव का आशीर्वाद और सानिध्य तथा गुरु पीएन मेहरा का मार्गदर्शन मिला तो सेवा का दायरा और बढ़ता गया। उन्हें महिला पतंजलि योग समिति की जिला प्रभारी की जिम्मेदारी मिली। इसके बाद विभिन्न तहसीलों और गांवों में योग शिविर लगाए, योग शिक्षक तैयार किए और लोगों को योग से जोड़ने का अभियान चलाया।

योग से शरीर ही नहीं, मन और समाज को भी मिला संतुलन

कोरोना काल में मधुबाला के पति को पैरालिसिस का अटैक पड़ा। प्राणायाम और योगाभ्यास से उन्हें लाभ मिला तो योग के प्रति उनका विश्वास और गहरा हो गया। आज पंजाबी कालोनी में उनकी निशुल्क योग कक्षा में हर उम्र की करीब 40 महिलाएं प्रतिदिन योग करती हैं।

योग और प्राणायाम के साथ प्राकृतिक चिकित्सा, त्राटक, ध्यान और विभिन्न काढ़ों का सेवन कराया जाता है। कई बार कक्षा में दो-चार लोग ही पहुंचे, लेकिन मधुबाला ने योग कक्षा बंद नहीं की।

उनका कहना है कि योग का असली उद्देश्य संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में स्वास्थ्य और सकारात्मकता लाना है। योग के साथ वह एक्यू थेरेपिस्ट की जिम्मेदारी भी निभा रही हैं।

योग में मिला सहयोगी ही जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि

योग शिक्षिका मधुबाला गुगलानी बताती हैं कि अपनी इस यात्रा में समाजसेवी गोपाल अग्रवाल और मीरा अग्रवाल के प्रति भी मैं आभार जताती हूं। जिन्होंने योग कक्षा के लिए स्थान उपलब्ध कराया।

उन्हें जो स्वास्थ्य और अवसर मिला, उसे दूसरों के साथ बांटना ही उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है। ईश्वर ने सेवा का अवसर दिया है, बस यही प्रार्थना है कि जब तक जीवन है, यह सेवा का सफर यूं ही चलता रहे।

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