रामपुर : जिले में वैक्सीनेशन की धीमी गति के चलते जिला रेड जोन में आ गया है। इसमें बाहर आने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जागरूकता अभियान चलाया है। प्रधानों, राशन विक्रेताओं, आंगनबाड़ी, आशा आदि का सहयोग लिया जा रहा है। इनके जरिए गांव में जाकर लोगों को वैक्सीन लगवाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके चलते वैक्सीनेशन पहले के मुकाबले दोगुणा हो गया है। वैक्सीन के लिए एक बार फिर केंद्रों पर कतार लग रही है।

कोरोना से बचाव के लिए 16 जनवरी से वैक्सीनेशन किया जा रहा है। शुरुआत में वैक्सीन के दिन निर्धारित थे। तब हेल्थ वर्कर और फ्रंट लाइन वर्कर को वैक्सीन लगाई जा रही थी। इसके बाद सोमवार से शनिवार तक रोजाना वैक्सीन लगाई जाने लगी। जून माह के बाद 18 साल से अधिक आयु वालों का वैक्सीनेशन शुरू हुआ तो केंद्रों पर लाइन लगने लगी। महाअभियान चलाए गए। अक्टूबर माह में फिर रफ्तार धीमी हो गई। केंद्रों से भीड़ गायब होने लगी। वैक्सीनेशन कम होने से लक्ष्य तक पहुंचना मुश्किल हो गया। इसके चलते शासन की समीक्षा में जिला रेड जोन में आ गया। इससे उबरने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कमर कस ली है। प्रधानों द्वारा बिना वैक्सीनेशन के राशन न देने का डर दिखाया तो लोग वैक्सीन लगवाने पहुंचने लगे। इसके अलावा प्रधान, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने भी घर-घर जाकर लोगों को जागरूक किया। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा. मनोज कुमार शुक्ला ने बताया कि अब सप्ताह के सातों दिन वैक्सीनेशन किया जा रहा है। केंद्रों की संख्या भी 300 तक हो रही है। इसके कारण रोजाना 20 हजार से ज्यादा लोगों को वैक्सीन लगाई जा रही है। अभी तक 11.32 लाख लोगों को पहली डोज लगाई जा चुकी है, जबकि 3.94 लाख लोगों को दूसरी डोज लगाई गई है।

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