बिलासपुर, जासं : पवित्र रमजान का महीना रहमतों और बरकतों का है। मुस्लिम समाज के लोग दिन-रात इबादत कर अल्लाह का नाम ले रहे हैं। मुहल्ला विशारतनगर स्थित जामा मस्जिद में तरावीह की नमाज के दौरान कुरआन मुकम्मल हुआ।

हाफिज वाहिद अली खां ने कुरआन सुनाया और हाफिज शराफत अली ने सुना। हाफिज वाहिद अली खां ने कहा कि रमजान के महीने में शैतान कैद हो जाता है, इसलिए इबादत बढ़ जाती है। कहा कि नमाज इस उम्मत की पहचान है। अल्लाह पूरे महीने के रोजे रखने वालों के गुनाहों को माफ कर देता है और 29 रमजान की रात उन्हें पाक साफ करके अपनी रहमत की गोद में ले लेता है। कहा कि रमजान के पूरे महीने अल्लाह का अर्श पहले आसमान पर आ जाता है और ऐलान करता है, जिसको जो नेकी चाहिए आ जाओ माफी के दरवाजे खुले हैं। उन्होंने बताया कि वे पिछले तकरीबन 44 सालों से लगातार कुरआन सुनाते चले आ रहे हैं। मस्जिद में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। साथ ही मस्जिद को भव्य रूप से सजाया गया है। इस अवसर पर मोहम्मद आरिफ खां अरोमा, मंजू खां, गच्छन खां, जावेद खां, हाफिज उस्मान, अजमद खां, असद खां, भूरा खां आदि मौजूद रहे।

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Posted By: Jagran

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