रामपुर : सीआरपीएफ आतंकी हमले के मुकदमे की सुनवाई के दौरान सभी आठ आरोपितों को पुलिस ने कड़ी सुरक्षा में कोर्ट में पेश किया। बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं की बहस हुई। अधिवक्ताओं ने आरोपितों पर लगे सभी आरोपों को निराधार बताया। अब मामले की सुनवाई नौ अक्टूबर को होगी।

सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर पर 31 दिसंबर 2007 की रात आतंकियों ने हमला किया था। इस हमले में सीआरपीएफ के सात जवान शहीद हो गए थे, जबकि एक रिक्शा चालक की भी जान गई थी। पुलिस ने हमले के आरोप में आठ लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें पाक अधिकृत कश्मीर का इमरान, मोहम्मद फारूख, मुंबई गोरे गांव का फहीम अंसारी, बिहार के मधुबनी का सबाउद्दीन सबा, प्रतापगढ़ के कुंडा का कौसर खां, बरेली के बहेड़ी का गुलाब खां, मुरादाबाद के मूंढापांडे का जंग बहादुर बाबा खान और रामपुर के खजुरिया गांव का मोहम्मद शरीफ शामिल हैं। सभी को सुरक्षा के मद्देनजर लखनऊ और बरेली की जेल में रखा गया है। शनिवार को मुकदमे की सुनवाई के लिए पुलिस सभी आरोपितों को कड़ी सुरक्षा में कोर्ट लाई। मुकदमे में बचाव पक्ष की ओर से स्थानीय अधिवक्ताओं के अलावा दिल्ली से आए अधिवक्ता एमएस खान ने भी बहस की। बहस में बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने अभियोजन द्वारा लगाए आरोपों को गलत बताया। बहस पूरी नहीं हो सकी। स्थानीय अधिवक्ता जमीर रिजवी ने बताया कि बताया कि बाकी बहस नौ अक्टूबर को होगी।

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