जागरण संवाददाता, रामपुर : सीआरपीएफ आतंकी हमले के मुकदमे की सुनवाई के लिए सभी आरोपितों को पुलिस ने कड़ी सुरक्षा में कोर्ट में पेश किया। हालांकि बचाव पक्ष के एक अधिवक्ता नहीं आए, जिसके चलते सुनवाई नहीं हो सकी। अब 15 अक्टूबर को सुनवाई होगी।

सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर पर 31 दिसंबर 2007 की रात आतंकियों ने हमला कर दिया था। हमले में सीआरपीएफ के सात जवान शहीद हो गए थे, जबकि एक रिक्शा चालक की भी जान गई थी। पुलिस ने हमले के आरोप में आठ लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें पाक अधिकृत कश्मीर का इमरान, मोहम्मद फारूख, मुंबई गोरे गांव का फहीम अंसारी, बिहार के मधुबनी का सबाउद्दीन सबा, प्रतापगढ़ के कुंडा का कौसर खां, बरेली के बहेड़ी का गुलाब खां, मुरादाबाद के मूंढापांडे का जंग बहादुर बाबा खान और रामपुर के खजुरिया गांव का मोहम्मद शरीफ शामिल हैं। सभी को सुरक्षा के मद्देनजर लखनऊ और बरेली की जेलों में रखा गया है। बुधवार को मुकदमे की सुनवाई के लिए सभी को कड़ी सुरक्षा में कोर्ट लाया गया। मुकदमे में बचाव पक्ष की ओर से दिल्ली के अधिवक्ता एमएस खान, स्थानीय अधिवक्ता मोहम्मद जमीर रिजवी और नावेद खां द्वारा बहस की जानी थी। दिल्ली के अधिवक्ता किसी कारण कोर्ट नहीं आ सके। इस पर कोर्ट ने अगली तारीख दी है।

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