जागरण संवाददाता, रामपुर। UP Politics : पूर्व सांसद बेगम नूरबानो ने कहा कि कांग्रेस के दरवाज़े सबके लिए खुले हैं। वर्तमान हालात से लड़ने के लिए सबको एक होना बहुत जरूरी है। देश को जोड़ने का काम सिर्फ कांग्रेस ने किया जो लोग दूसरे दलों में घुटन महसूस कर रहे हैं। वह देश हित के लिए कांग्रेस से जुड़े।

कांग्रेस छोड़कर गए लोगों को वापस आना चाहिए

देश की मजबूती के लिए कांग्रेस जरूरी है। जो लोग कांग्रेस छोड़कर चले गए हैं, उनको वापस आना चाहिए। उनके लिए कांग्रेस और नूरमहल के दरवाज़े खुले हैं। यह बात उन्होंने हिमायत उल्लाह मार्किट स्थित कांग्रेस के जिला कार्यालय पर कांग्रेस पदाधिकारियों संग निकाय चुनाव को लेकर मंथन करते हुए कही।

नगर निकाय चुनाव की तैयारी

उन्होंने कहा कि नगर निकाय चुनाव के लिए हमें पूरी मेहनत से काम करना है। लोगों को जोड़ना है, जो लोग हमसे दूर गए हैं, उनको दोबारा घर वापसी कराना है। नगर पालिकाओं पर कांग्रेस का परचम फहराना है। नगरपालिका पर हमेशा कांग्रेस का कब्ज़ा रहा है। इस बार 15 वर्षो बाद आपके पास मौका है। कांग्रेस को मजबूत करना है।

निकाय चुनाव में दमखम के साथ उतरेगी कांग्रेस

आने वाले चुनाव में कांग्रेस पार्टी निकाय चुनाव में पूरे दमखम के साथ उतरेगी। इस मौके पर पूर्व विधायक अफ़रोज़ अली खां,शहर अध्यक्ष नोमान खां, मामून शाह खां, महफूज़उर्रहमान खां, एस के अग्रवाल, जगमोहन मोना, लल्लन खां, नासिर खां, तारिक नेता, अब्बास मेम्बर, मास्टर फिरोज़ खां, रामगोपाल सैनी, जब्बार खां, खुशनूद खां, महफूज़ मंसूरी, दिव्यांश सिंघल, शैजी सैफी, वासिक अली, जिशान खां, शकील मंसूरी, अंकुश अग्रवाल, रहमान अली, इमरोज़ मंसूरी आदि मौजूद रहे।

भगवान वाल्मीकि की शिक्षा को जीवन में अमल में लाएं

वीर श्रेष्ठ अमर आदिवासी ने कहा कि भगवान वाल्मीकि शिक्षाओं को अपनाकर उनके संदेश को जीवन में लाना है। यह बात उन्होंने जिला बिजनौर से चलकर रामपुर पहुंची बचत और शिक्षा यात्रा के स्वागत के मौके पर वाल्मीकि बस्ती में कही। उन्होंने कहा कि भगवान वाल्मीकि का मानव जाति के लिए संदेश पहले ज्ञान हासिल करो यानी शिक्षा ग्रहण करो, लेकिन वाल्मीकि समाज शिक्षा से कोसों दूर है।

इसी को लेकर यह यात्रा निकाली जा रही है ताकि समाज के लोग जागरूक हों और शिक्षा ग्रहण करने पर ध्यान दें। उन्होंने कहा कि आदि कवि वाल्मीकि जी के हाथ में कलम को दर्शाते हुए कहा कि यही कलम कुश और लव ने अपना कर और एक विचार धारा से जुड़ कर एक बड़ी सेना को पराजित किया था।

अगर हम आदि कवि वाल्मीकि की कलम को अपने बच्चों के जीवन में शामिल करें तो हम भी अपने जीवन के हर संघर्ष को आसानी से जीत सकते हैं लेकिन हमारा मार्ग स्कूल होना चाहिए। इससे पूर्व रामरतन लाल, नवीन राही, राजेश रतन, बाबू लाल कौशल ने यात्रा का नेतृत्व करते हुए स्वागत किया।

Edited By: Samanvay Pandey

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