जागरण संवाददाता, रामपुर : आचार संहिता के दो मुकदमों में हाजिर न होने पर अदालत ने फिर से सांसद आजम खां के खिलाफ जमानती वारंट जारी किए हैं। इनमें एक मामला पूर्व सांसद एवं फिल्म अभिनेत्री जयाप्रदा के खिलाफ अशोभनीय टिप्पणी करने का है।

आचार संहिता के दोनों मामले लोकसभा चुनाव के हैं। लोकसभा चुनाव में जयाप्रदा भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ी थीं, जबकि सपा के टिकट पर आजम खां पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे थे। चुनाव प्रचार के दौरान शाहबाद में सपा की जनसभा हुई थी, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री एवं सपा के मुखिया अखिलेश यादव भी मंच पर मौजूद थे। यहां आजम खां ने जयाप्रदा को लेकर अशोभनीय टिप्पणी की थी। इस मामले में उनके खिलाफ शाहबाद कोतवाली में आचार संहिता उल्लंघन का मुकदमा दर्ज हुआ था। इसके अलावा सैफनी में भी चुनाव प्रचार के दौरान आजम खां ने प्रशासनिक अधिकारियों को लेकर टिप्पणी की थी। इसमें भी उनके खिलाफ शाहबाद कोतवाली में रिपोर्ट हुई थी। इन दोनों मामलों में पुलिस ने अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। दोनों मामले षष्टम् अपर जिला जज के न्यायालय में विचाराधीन हैं। इन दोनों मामलों में पिछली तारीख पर हाजिर न होने पर अदालत ने सांसद के खिलाफ जमानती वारंट जारी किए थे। गुरुवार को भी दोनों मुकदमों की सुनवाई थी। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता राम औतार सिंह सैनी ने बताया कि सांसद कोर्ट में हाजिर नहीं हुए, जिस पर न्यायालय ने फिर से जमानती वारंट जारी कर दिए हैं। अदालत अब दो दिसंबर को सुनवाई करेगी।

सांसद के खिलाफ चार्जशीट पर लगाई आपत्ति

रामपुर : प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में पुलिस द्वारा लगाई चार्जशीट पर सांसद आजम खां ने आपत्ति जताई है। उन्होंने अपने अधिवक्ता की ओर से गुरुवार को कोर्ट में आपत्ति दाखिल की। आपत्तिजनक बयानबाजी का यह मामला साढ़े पांच साल पुराना है। तब लोकसभा चुनाव के दौरान किले के मैदान में हुई जनसभा में सांसद ने प्रधानमंत्री मोदी के एक बयान पर टिप्पणी की थी। प्रधानमंत्री ने एक साक्षात्कार में एक विदेशी मैग्जीन ने पीएम मोदी से कुछ सवाल किया था, जिसके बारे में उन्होंने कहा था कि कुत्ते का बच्चा भी अगर आपकी कार के नीचे आता है तो दुख होता है। उनके इसी बयान को आजम खां ने मुस्लिमों से जोड़ते हुए प्रधानमंत्री पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इस मामले में उनके खिलाफ शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज हुआ था। इस मुकदमे की सुनवाई पहले हाईकोर्ट में चल रही थी, जहां से सांसद ने जमानत करा ली थी। अब यह मामला स्थानीय अदालत में सुनवाई के लिए आ गया है। गुरुवार को सांसद के अधिवक्ता नासिर सुल्तान ने इस मुकदमे की चार्जशीट पर आपत्ति डाली। अधिवक्ता का कहना है कि चार्जशीट वर्ष 2018 में लगाई गई। मुकदमा जिन धाराओं में दर्ज किया गया था, उनमें चार्जशीट नहीं लगाई है। इस आपत्ति पर अदालत तीन दिसंबर को सुनवाई होगी।

Posted By: Jagran

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