2027 विधानसभा चुनाव से तय होगा आजम खान का सियासी भविष्य, क्या जेल से बाहर आकर बदलेंगे रामपुर का समीकरण?
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान का राजनीतिक भविष्य 2027 के विधानसभा चुनाव से तय होगा, क्योंकि वे कई ...और पढ़ें

आजम खान
HighLights
चुनाव से पहले आजम को जेल से बाहर निकालने के लिए पैरोकारों ने झोंकी ताकत
अनिल अवस्थी, रामपुर। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान के राजनीतिक भविष्य का फैसला अब 2027 का विधानसभा चुनाव करेगा। करीब चार दशक की राजनीति में वह कई बार सत्ता के केंद्र में रहे हैं। आजम खान के सामने इस बार चुनौती सिर्फ चुनाव में सक्रियता दिखाने की नहीं बल्कि, अपना अस्तित्व बचाने की भी है।
फिलहाल वह हज समिति की जमीन की बिक्री में 2.08 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान कराने के आरोप में घिरे हैं। इस मामले में विजिलेंस ने उनके खिलाफ लखनऊ में प्राथमिकी दर्ज कराई है।
दो पैन कार्ड मामले में पिछले वर्ष 17 नवंबर से बेटे अब्दुल्ला के साथ रामपुर जेल में कैद काट रहे मोहम्मद आजम खान को विधानसभा चुनाव से पूर्व बाहर लाने के लिए उनके पैरोकार जोरआजमाइश में लगे हैं।
दो पासपोर्ट मामले में अब्दुल्ला की सात वर्ष की सजा एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट से निरस्त होने से पैरोकारों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। इसी आधार पर वह पैन कार्ड मामले में हाईकोर्ट गए हैं। इनका मानना है कि यदि आजम जेल से बाहर आ गए तो चुनावी परिदृश्य बदल जाएगा।
हालांकि, उनके अधिकतर पैरोकार सपा से टिकट के दावेदार ही हैं। एक हद तक उनकी धारणा से गुरेज भी नहीं किया जा सकता। लंबे समय से कानूनी दांवपेंच में उलझने और जेल में रहने के बावजूद समर्थकों में आजम की पैठ बरकरार है।
यही वजह है कि चुनाव से पहले सपा के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल यादव उनसे मिलने जेल पहुंचे थे। वहीं, जौहर विश्वविद्यालय के अवैध घोषित भवनों को तोड़ने के मामले में अखिलेश यादव ने विधायकों व सांसदाें का अलग-अलग प्रतिनिधिमंडल भी रामपुर भेजा था।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय भी विश्वविद्यालय पहुंचकर आजम से अपनी हमदर्दी जताने का प्रयास कर चुके हैं। अब प्रश्न यह उठता है कि चुनाव तक आजम खान जेल से बाहर आएंगे भी या नहीं?
अगर आए भी तो सजायाफ्ता होने के कारण वह न खुद चुनाव लड़ सकते हैं और न ही अब्दुल्ला या पत्नी तजीन फात्मा को मैदान में उतार सकते हैं। ऐसी स्थिति में उन्हें अपने पैरोकारों पर ही दांव आजमाना पड़ेगा।
चुनाव में सपा उन्हें कितनी तवज्जो देगी, यह भी मायने रखेगा। क्योंकि, सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी से आजम खान के छत्तीस के आंकड़े हैं। सपा जिलाध्यक्ष अजय सागर कहते हैं कि न्यायालय पर पूरा भरोसा है, चुनाव से पहले आजम खान जेल से बाहर आएंगे। उनके नेतृत्व में न सिर्फ चुनाव लड़ा जाएगा बल्कि, वह खुद चुनाव मैदान में उतरेंगे।
भाजपा भी जोरआजमाइश में लगी
न्यायालय से सजा मिलने के बाद दिसंबर 2022 में रामपुर शहर से सपा विधायक आजम खान की विधानसभा सदस्यता छिन गई थी। इसके बाद उपचुनाव में भाजपा ने पहली बार इस सीट पर आकाश सक्सेना के रूप में अपना खाता खोला था।
इस सीट पर कब्जा बरकरार रखने के लिए भाजपा भी पूरी जोरआजमाइश में लगी है। भाजपा जिलाध्यक्ष हरीश गंगवार कहते हैं कि संगठन पूरी तैयारी से चुनाव मैदान में उतरेगा और बाजी भी मारेगा।
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