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    Azam Khan: तेजी से चल रही सुनवाई, 18 दिन में तीन मुकदमों में आया फैसला; पासपोर्ट मामले में 5 दिसम्बर अहम

    Updated: Sat, 29 Nov 2025 12:01 PM (IST)

    आज़म खान के खिलाफ़ चल रहे मुकदमों की सुनवाई तेज़ी से हो रही है। पिछले 18 दिनों में तीन मुकदमों में फ़ैसला आया है। इन फैसलों का असर आजम खान के राजनीतिक भविष्य पर पड़ सकता है। मुकदमों की तेज़ी से सुनवाई जारी है।

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    आजम खान, फाइल फोटो।

    जागरण संवाददाता, रामपुर। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव आजम खां के खिलाफ अब तक 13 मुकदमों में फैसला आ चुका है। उन्हें सात मामलों में सजा मिल चुकी है, जबकि छह मुकदमों में वह बरी हो गए हैं। उनके मुकदमों की सुनवाई बहुत तेजी से चल रही है। इसी माह में 18 दिन में तीन मुकदमों में फैसला आ चुका है। इनमें दो पैनकार्ड मामले में आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला को सात साल की सजा हुई, जबकि आजम खां दो मामलों में बरी हुए।

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    18 दिन में तीन मुकदमों में आया फैसला


    आजम खां पर वर्ष 2019 में ताबड़तोड़ 84 मुकदमे दर्ज हुए थे। इनमें ज्यादातर न्यायालय में विचाराधीन हैं। 13 मुकदमों में फैसला हो चुका है। इनमें पहला मुकदमा मुरादाबाद का है। 13 फरवरी 2023 को एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट मुरादाबाद ने छजलैट में हाईवे जाम करने के मामले में आजम खां और अब्दुल्ला आजम को दो-दो साल की सजा सुनाई थी। इसमें अब्दुल्ला की विधायकी चली गई थी। इसके अलावा अन्य मामलों में रामपुर की अदालत से फैसले हुए।

    पहला फैसला सुनाया

    27 अक्टूबर 2022 को रामपुर की अदालत ने पहला फैसला सुनाया। यह मामला भड़काऊ भाषण का था, जो मिलक कोतवाली में दर्ज हुआ था। इसमें एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट (मजिस्ट्रेट ट्रायल) ने उन्हें तीन साल की सजा सुनाई थी। सजा के खिलाफ उन्होंने एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट (सेशन ट्रायल) में अपील की थी। सजा के फैसले को सेशन कोर्ट ने निरस्त कर दिया था।

    आजम खां को दो साल कैद और ढाई हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी

    इसके बाद 15 जुलाई 2023 को भड़काऊ भाषण के एक दूसरे मामले में एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट (मजिस्ट्रेट ट्रायल) ने आजम खां को दो साल कैद और ढाई हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। यह सजा शहजादनगर थाने में दर्ज मुकदमे में हुई थी। इसमें सजा के खिलाफ उनकी अपील सेशन कोर्ट से खारिज हो चुकी है।

    दो जन्म प्रमाण पत्र का मामला

    तीसरी बार सजा दो जन्म प्रमाण पत्र मामले में हुई थी। यह सजा भी एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट (मजिस्ट्रेट ट्रायल) में 18 अक्टूबर 2023 को हुई थी। इसमें आजम खां, उनकी पत्नी पूर्व सांसद डा. तजीन फात्मा और बेटे पूर्व विधायक अब्दुल्ला को सात-सात साल कारावास की सजा हुई थी।

    चौथा मामला

    आजम खां के चौथे मामले में 23 दिसंबर 2023 को फैसला हुआ था। यह मामला पड़ोसी से मारपीट का था। इसमें आजम खां के अलावा उनके भाई सेवानिवृत्त इंजीनियर शरीफ खां, बेटे अब्दुल्ला और भतीजे बिलाल पुत्र शरीफ खां भी आरोपित थे। सभी को न्यायालय ने आरोप साबित न होने पर बरी किया था।

    डूंगरपुर प्रकरण के चार मामलों में आया फैसला


    इसके बाद आजम खां के खिलाफ डूंगरपुर प्रकरण के चार मामलों में फैसला आया। इनमें एक मामले में 31 जनवरी 2024 काे एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट (सेशन ट्रायल) ने फैसला सुनाया था। इसमें आजम खां के अलावा सेवानिवृत्त सीओ आले हसन, पूर्व नगर पालिकाध्यक्ष अजहर खां, सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष ओमेंद्र चौहान समेत अन्य सपाई आरोपित थे। इस मामले में न्यायालय ने सभी को बरी कर दिया था। 18 मार्च 2024 को फिर डूंगरपुर प्रकरण के दूसरे मामले में न्यायालय ने फैसला सुनाया, जिसमें आजम खां को सात साल कारावास की सजा सुनाई थी, जबकि पूर्व सीओ सिटी आले हसन खां, पूर्व पालिकाध्यक्ष अजहर खां और बरकत अली ठेकेदार को पांच-पांच साल कैद की सजा सुनाई थी।

    सभी आरोपित हुए बरी

    इसके तीन दिन बाद 21 मार्च 2024 को डूंगरपुर के तीसरे मामले में फैसला आया, जिसमें आजम खां समेत सभी आरोपितों को बरी कर दिया गया। इसके बाद 30 मई 2024 को डूंगरपुर प्रकरण के एक अन्य मुकदमे में फैसला आया, जिसमें उन्हें 10 साल के कारावास और 14 लाख रुपये जुर्माने की सजा हुई है। यह अब तक की सबसे बड़ी सजा है। 31 जुलाई 2024 को डूंगरपुर प्रकरण के ही एक अन्य मामले में एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट (सेशन ट्रायल) ने आजम खां समेत अन्य सात आरोपितों को बरी कर दिया। डूंगरपुर प्रकरण लोगों के घर उजाड़कर आसरा आवास योजना के तहत आवास बनवाने से संबंधित है।

    भड़काऊ भाषण का मामला

    11 नवंबर 2025 को भड़काऊ भाषण और चुनाव आचार संहिता उल्लंघन के मामले में आजम खां को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया। यह मुकदमा सिविल लाइंस कोतवाली में तत्कालीन उप जिलाधिकारी सदर प्रेम प्रकाश तिवारी की ओर से दर्ज कराया गया था। आरोप था कि 23 अप्रैल 2019 को आजम खां की एक वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हुई, जिसमें वह जनसभा में मतदाताओं को पुलिस के प्रति भड़का रहे थे और निर्धारित अवधि के बाद भी मतदान करने के लिए उकसा रहे थे। इसे आदर्श चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन मानते हुए आजम खां के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

    दो पैन कार्ड के मामले आया फैसला

    17 नवंबर 2025 को आजम खां और अब्दुल्ला के खिलाफ दो पैन कार्ड मामले में फैसला आया, जिसमें एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट (मजिस्ट्रेट ट्रायल) ने आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला को सात-सात साल की सजा सुनाई थी। शुक्रवार को एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट ने आजम खां को पूर्व सांसद अमर सिंह की बेटियों पर टिप्पणी करने के मामले में आरोप साबित न होने पर दोषमुक्त कर दिया है।



    पासपोर्ट मामले में पांच दिसंबर को फैसला

     

    सपा नेता आजम खां के बेटे पूर्व विधायक अब्दुल्ला के खिलाफ चल रहे दो पासपोर्ट मामले में भी सुनवाई पूरी हो चुकी है। न्यायालय ने फैसले के लिए पत्रावली सुरक्षित रख ली है। पांच दिसंबर को फैसला आएगा। दो पासपोर्ट मामले में अब्दुल्ला अकेले आरोपित हैं। इससे पहले दो जन्म प्रमाण पत्र में आजम खां, उनकी पत्नी और बेटे को सात साल की सजा हो चुकी है। 17 नवंबर को दो पैन कार्ड मामले में आजम खां और अब्दुल्ला को सात साल की सजा सुनाई गई, जिसके बाद दोनों को जेल भेज दिया गया। अब पासपोर्ट मामले में फैसला आएगा।