सीएमओ की टीम ने मारा छापा, अस्पताल को किया सील

जागरण संवाददाता, रामपुर : जिले में चिकित्सा सेवाओं के नाम पर फर्जीवाड़ा रुक नहीं पा रहा है। अब फिर एक निजी अस्पताल का पर्दाफाश हुआ, जहां चिकित्सक ही नहीं थे। अस्पताल में मरीज भी मिले। इनमें आपरेशन तक के मरीज भर्ती थे। इस पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी की टीम ने अस्पताल को सील कर दिया। अस्पताल के संचालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी है। जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर चल रहे फर्जी अस्पतालों के खिलाफ शिकंजा कस दिया है। जिलाधिकारी आन्जनेय कुमार सिंह के निर्देश पर ऐसे अस्पतालों के खिलाफ छापमारा अभियान चलाया जा रहा है। अब तक करीब आधा दर्जन अस्पतालों पर कार्रवाई की जा चुकी है। मंगलवार को भी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुबोध कुमार शर्मा ने एक शिकायत पर अपनी टीम को भेजा। टीम में शामिल अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राकेश चंद्रा ने अजीमनगर थाना क्षेत्र के बढ़पुरा शुमाली में चल रहे अस्पताल पलक चेरिटेबिल पॉलीक्लीनिक पर छापा मारा। उनके साथ अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अजय कुमार वर्मा और अजीमनगर थाने की पुलिस फोर्स भी थी। निरीक्षण में पता चला कि अस्पताल का सीएमओ कार्यालय में पंजीकरण है। पंजीकरण के समय अस्पताल में डॉ. मुनेश कुमार द्वारा चिकित्सा सेवाएं करने की जानकारी दी गई थी, लेकिन वह अस्पताल में नहीं थे। जानकारी से पता चला कि वह अस्पताल में अब सेवाएं नहीं दे रहे हैं और उन्होंने इसकी जानकारी सीएमओ कार्यालय में दे दी थी। अस्पताल के बोर्ड पर एमबीबीएस एमएस डॉ. एस. शर्मा के नाम का बोर्ड लगा था। संचालक से जानकारी पता चला कि डॉ. एस शर्मा द्वारा चिकित्सा सेवाएं करने की सूचना सीएमओ कार्यालय में नहीं दी गई थी और मौके पर भी वह नहीं थे। हालांकि अस्पताल में मरीज थे। दो मरीज तो आपरेशन के लिए भर्ती किए गए थे। इनका आपरेशन कौन करेगा? इसकी कोई जानकारी नहीं दे सका। अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राकेश चंद्रा ने बताया कि अस्पताल का संचालन इमरता गांव के महावीर सिंह कर रहे थे। उनसे डॉ. एस शर्मा के बारे में जानकारी की, लेकिन वह कोई जानकारी नहीं दे सके। इस पर अस्पताल संचालक और डॉ. एस शर्मा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए अजीमनगर थाने में तहरीर दे दी है।

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