रामपुर : राज्यसभा सदस्य अमर ¨सह लंबे अरसे बाद रामपुर आए, लेकिन आजम खां के खिलाफ उनके शहर में ही सियासी तीर चलाकर रामपुर का माहौल गरमा गए। उनके पुराने समर्थक भी खुलकर मैदान में आ गए और जोरदार स्वागत किया।

अमर ¨सह और आजम खां कभी दोनों ही समाजवादी पार्टी में हुआ करते थे। दोनों के संबंध भी अच्छे थे। आजम खां के बुलावे पर कई बार सपा मुखिया मुलायम ¨सह के साथ अमर ¨सह भी रामपुर आए। 2004 के लोकसभा चुनाव में अमर ¨सह की करीबी फिल्म अभिनेत्री जयाप्रदा सपा के टिकट पर रामपुर से लड़ी थीं। अमर ¨सह कहते हैं कि उस चुनाव में भी जयाप्रदा को मेरे कहने पर नहीं, बल्कि आजम खां के कहने पर रामपुर से प्रत्याशी बनाया गया था। उस चुनाव में जयाप्रदा विजयी रहीं। इसके बाद उनकी जीत का जश्न भी मनाया गया, लेकिन कुछ दिन बाद भी जयाप्रदा और आजम खां के बाद दूरियां बढ़ने लगीं। 2009 का लोकसभा चुनाव आते-आते दोनों के संबंधों में दरार पड़ गई। तब आजम खां ने जयाप्रदा का साथ नहीं दिया, लेकिन वह चुनाव जीत गईं। अमर ¨सह ने गुरुवार को इस बात का भी जिक्र किया। कहा कि रामपुर के कई नेताओं ने हमारा ईमानदारी से साथ दिया। शिव बहादुर सक्सेना और शन्नू खां का उन्होंने कई बार जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने चुनाव में हमारा साथ दिया था। आजम खां ने उन्हें परेशान करने में कोई कमी नहीं छोड़ी। हम रामपुर के लोगों की इज्जत करते हैं। हम जौहर यूनिवर्सिटी का विरोध नहीं कर सकते। हमने तो यूनिवर्सिटी के लिए बड़ी रकम नेता जी को दी थी। हम चाहते हैं कि रामपुर के बच्चे अच्छी तालीम हासिल करें। तालिमयाफ्ता होंगे तो आजम खां के बहकावे में नहीं आ पाएंगे। आजम खां ने हमेशा तानाशाही की है। वह चाहते हैं कि रामपुर के लोग उनकी मर्जी से ही सांस लें। आगामी लोकसभा चुनाव में क्या जयाप्रदा रामपुर से चुनाव लड़ेंगी। इसके जवाब में अमर ¨सह बोले कि अभी हम कुछ नहीं कह सकते। भले ही उन्होंने सटीक जवाब नहीं दिया, लेकिन लोगों में यही चर्चा है है कि जयाप्रदा रामपुर से चुनाव लड़ने जा रही हैं, इसीलिए रामपुर के सियासी माहौल को गरमाया जा रहा है। अमर ¨सह के दौरे से लोगों में यह भी चर्चा रही कि जयाप्रदा भाजपा की प्रत्याशी होंगी या भाजपा गठबंधन के अपना दल से। कुछ लोग यह भी कह रहे थे कि अगर शिवपाल के सेक्यूलर मोर्चे को भाजपा गठबंधन में शामिल किया गया तो वह उसकी भी प्रत्याशी हो सकती हैं।

Posted By: Jagran