रायबरेली : दिल्ली के निजामुद्दीन से तब्लीगी जमात मरकज में शामिल होकर लौटे एक शख्स को मंगलवार की सुबह जिला अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया। उसे रायबरेली शहर लौटे 22 दिन गुजर चुके हैं। उसमें फिलहाल कोरोना के लक्षण नहीं मिले हैं। मगर, उसको सुरक्षा के दृष्टिगत वार्ड में ही रोका गया है।

ये मामला मंगलवार को जानकारी में आया। जिसके बाद स्वास्थ्य टीम शख्स के घर पहुंची और उसे सतर्कता पूर्वक जिला अस्पताल लाया गया। यहां चिकित्सकों की टीम ने उसका परीक्षण किया। उसमें कोरोना के लक्षण भले ही न मिले हों मगर, अभी उसे आइसोलेशन वार्ड में ही रोका गया है। बता दें कि निजामुद्दीन में तब्लीगी जमात मरकज में शामिल होने वाले लोगों में कोरोना के लक्षण मिले हैं। कुछ लोगों की मौत भी हो चुकी है। इसी के मद्देनजर प्रशासन मरकज से लौटने वालों पर खासी निगरानी बरत रहा है। शायद ही ऐसे लोगों के बारे में पुलिस प्रशासन को सूचना देने की अपील की है। वरिष्ठ चेस्ट फिजीशियन डॉ. बीरबल ने बताया कि जो शख्स यहां भर्ती कराया गया है, उसको शहर लौटे 22 दिन हो चुके हैं। इस बीच उसका स्वास्थ्य गड़बड़ नहीं हुआ। उसमें कोरोना के लक्षण अभी भी नहीं हैं। फिर भी एहतियातन उसे अस्पताल में रोका गया है।

67 बंदी जेल से रिहा

मंगलवार को जिला कारागार से कुल 67 विचाराधीन बंदियों को आठ सप्ताह के लिए जेल से रिहा कर दिया गया। इनमें से 11 शांतिभंग वाले थे। जबकि 56 ऐसे थे, जिनको सात साल से कम सजा वाले मुकदमों में जेल भेजा गया था। साथ ही इन मुकदमों में अभी तक विचारण चल रहा है, सजा नहीं सुनाई गई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ऐसा किया गया है। जेल अधीक्षक ज्ञान प्रकाश ने बताया कि ये लोग घरों में जाकर अपने परिवार के लोगों को कोरोना से बचाव में मदद करेंगे। आठ सप्ताह बाद यानी 24 मई को इन्हें कोर्ट में पेश होना होगा।

Posted By: Jagran

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