रायबरेली : शहर के फिरोज गांधी डिग्री कॉलेज सभागार में शनिवार को स्वच्छ भारत मिशन के तहत कार्यशाला हुई। यह कार्यशाला सिर्फ स्वच्छता के तौर-तरीकों के प्रचार-प्रसार का जरिया ही नहीं रही, बल्कि बीते 20 साल में हुए बदलावों से भी लोगों को अवगत कराया गया।

नगरीय विकास अभिकरण की ओर से आयोजित इस कार्यशाला की अध्यक्षता जिला अधिकारी संजय खत्री ने की। इसमें नगर क्षेत्र की स्वयं सेविकाओं के साथ स्वास्थ्य विभाग, नगर पालिका समेत अन्य विभागों के अफसर व कर्मचारी भी शामिल हुए। प्रशिक्षक श्रीनिवासन ने करीब पांच घंटे तक स्वच्छता पर अपने विचार व्यक्त किए। साफ-सफाई के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि करीब बीस साल पहले सफाई का मतलब सिर्फ कूड़े-कचरे को आबादी से दूर करना था। तब आवासीय क्षेत्रों से कचरा हटाकर एक जगह पर डंप कर दिया जाता था। ज्यादातर जगह कूड़े में आग भी लगा दी जाती थी। इस स्थिति में पर्यावरण को काफी नुकसान होता था। यदि आग नहीं लगाई तो कूड़े में पड़े प्लास्टिक व पॉलीथिन मवेशियों के लिए हानिकारक साबित होते थे। वहीं, अब सोच बदल गई है। कूड़े-कचरे को एकत्र न करके उसके निस्तारण के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि घरों से निकलने वाला हर तरह का कूड़ा उपयोगी होता है। चाहे वह प्लास्टिक की बोतलें हों या फिर पॉलीथिन के कैरीबैग। सिर्फ उनका सही तरीके से निस्तारण होना चाहिए। इसी पर जोर दिया जा रहा है। इस दौरान उन्होंने शहर को स्वच्छ रखने और कूड़े के निस्तारण के तौर तरीके भी बताए। इस दौरान पुलिस अधीक्षक शिवहरी मीना, डूडा के परियोजना अधिकारी सुधाकांत, सीएमओ डीके ¨सह समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

खाली पड़ी रहीं कुर्सियां

स्वयं सेविकाओं समेत कार्यशाला में कर ब छह सौ लोगों के आने की उम्मीद थी। मगर, ऑडिटोरियम में अधिकतर कुर्सियां खाली पड़ी रहीं। पूरी भीड़ आगे ही सिमटी थी, जबकि पीछे की कुर्सियों में बैठने के लिए कोई था ही नहीं। इसकी वजह सिर्फ कार्यशाला का व्यापक प्रचार-प्रसार न होना रहा।

आज ग्रामीण इलाकों की कार्यशाला

फिरोज गांधी डिग्री कॉलेज के सभागार में ही रविवार को ग्रामीण इलाकों में कूड़े के स्थाई व त्वरित निस्तारण के लिए कार्यशाला होगी। इसमें सभी प्रेरकों, ब्लॉक प्रमुखों, समाजसेवियों, खंड प्रेरकों तथा ग्राम प्रधानों को बुलाया गया है।

Posted By: Jagran