रायबरेली : समाजवादी पार्टी में फिलहाल सबकुछ पटरी पर नहीं है। यह हम नहीं कह रहे, बल्कि पूर्व जिलाध्यक्ष के जेल जाने के बाद संगठन में बढ़ती तनातनी और वरिष्ठ नेताओं के दौरे के समय कार्यकर्ताओं की सार्वजनिक नाराजगी इसका प्रमाण है। अलग-अलग खेमों के नेता रुक-रुक कर चर्चाओं को पंख लगवा रहे हैं। अब बड़ी सुगबुगाहट तो यह भी है कि संगठन का चेहरा जल्द ही घोषित होने वाला है। यहां समाजवादी पार्टी में निवर्तमान अध्यक्ष के सहारे कामकाज निपटाया जा रहा है। कुर्सी पाने की चाह में करीब आधा दर्जन से ज्यादा नेता लखनऊ में मौके-बेमौके जाकर परिक्रमा कर रहे हैं। करीब ढाई महीने बीत जाने के बाद तस्वीर साफ नहीं हो रही है। इस बीच पार्टी में खेमेबंदी भी बढ़ती जा रही है। क्योंकि अपने-अपने नेताओं की पैरवी में जाने वाले कार्यकर्ताओं की सूचना हर खेमे तक आसानी से पहुंच जाती है। ऐसे में गोपनीय कुछ भी नहीं रहता और आपसी मतभेद बढ़ते जाते हैं। अभी तक अध्यक्ष पद का सबसे लंबा कार्यकाल निभाने वाले राम बहादुर यादव की टीम को करीब ढाई महीने पहले भंग कर दिया गया था। जिसके बाद नए अध्यक्ष का चयन होना है। पार्टी सूत्रों की मानें तो अध्यक्ष पद के लिए राम बिलास यादव, रामे यादव, वीरेंद्र यादव, शमशाद, अरविद यादव सहित कुछ अन्य लोग तगड़ी पैरवी में जुटे हैं। लेकिन, बाजी किसके हाथ लगेगी यह तो समय बताएगा।

आदित्य हत्याकांड के बाद अपनों से घिरा संगठन ..

दरअसल सोमू ढाबा मालिक व उनके पुत्र जब आदित्य हत्याकांड में जेल गए, तभी से सपा में खलबली मची है। क्योंकि ढाबा मालिक सुरेश यादव सपा के नेता होने के साथ व्यापार मंडल के भी पदाधिकारी रहे। उनके जेल जाने पर पार्टी की विरोध वाली शैली में वो तेजी नहीं दिखी। इसी बीच पूर्व सपा जिलाध्यक्ष आरपी यादव को भी जेल भेज दिया गया। उधर, मामले में प्रदेश नेतृत्व पल-पल की रिपोर्ट लेता रहा। फिर लखनऊ से जांच टीम आई। उसके बाद गेस्ट हाउस में पार्टी कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी कर दी। ये सारी रिपोर्ट लेकर नेता लौट गए। अभी तक उस रिपोर्ट का खुलासा तो हुआ नहीं, साथ ही संगठन का खाका तय नहीं हो सका।

Posted By: Jagran

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