एक एकड़ की खेती से किसान कर रहा लाखों की कमाई, UP की 108 पंखुड़ियों वाले कमल की फसल देखने पहुंचे वैज्ञानिक
रायबरेली के शिवगढ़ में प्रदेश की पहली नमो 108 कमल की खेती का राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (एनबीआरआइ) लखनऊ के वैज्ञानिकों ने निरीक्षण किया।

HighLights
रायबरेली के बेड़ारु में नमो 108 कमल की खेती।
एनबीआरआइ लखनऊ के वैज्ञानिकों ने फसल का निरीक्षण किया।
यह किस्म किसानों के लिए आय का नया स्रोत बनेगी।
संवाद सूत्र, शिवगढ़ (रायबरेली)। जिले के ग्राम पंचायत बेड़ारु में प्रदेश की पहली नमो 108 कमल की खेती की जा रही है। नमो 108 कमल की उन्नतशील खेती का बुधवार को राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (एनबीआरआइ) लखनऊ के वैज्ञानिकों ने निरीक्षण किया। डा. केजी सिंह के नेतृत्व में पहुंची चार सदस्यीय टीम ने खेत में कमल की फसल की ग्रोथ और गुणवत्ता का बारीकी से जायजा लिया।
निरीक्षण के बाद वैज्ञानिक शिवगढ़ राजमहल स्थित महेश विलास पैलेस पहुंचे। यहां वार्ता में वैज्ञानिक डा. केजी सिंह ने नमो 108 कमल की विशेषताओं और खेती से होने वाले संभावित लाभ की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सीएसआइआर-एनबीआरआइ द्वारा विकसित नमो 108 कमल एक विशेष किस्म है, जिसमें 108 पंखुड़ियां होती हैं।
भारतीय परंपरा में 108 संख्या को शुभ माना जाता है। उन्होंने बताया कि कई वर्षों के अनुसंधान के बाद इस किस्म को विकसित किया गया है। भारतीय जलवायु के अनुकूल यह कमल प्रदेश के किसानों के लिए आय बढ़ाने का नया अवसर बन सकता है।
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किसानों को इसकी खेती के लिए प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। वैज्ञानिक ने बताया कि बेड़ारु में करीब चार एकड़ भूमि में नमो 108 कमल की खेती की जा रही है। टीम ने फसल की वर्तमान स्थिति का निरीक्षण कर आवश्यक जानकारी ली। इस मौके पर तकनीकी अधिकारी डा. अतुल वत्रा, शोध छात्रा डा. अनीशिया, किसान सत्येंद्र सिंह भदौरिया, रामनाथ, शालू गुप्ता, शिवा वर्मा, दुर्गा सिंह समेत अन्य किसान मौजूद रहे।
चार एकड़ में हो रही खेती, एक लाख फूल निकलने की संभावना
बेडा़रू में ब्लाक प्रमुख कुंवर हनुमंत प्रताप सिंह की ओर से करीब चार एकड़ क्षेत्रफल में नमो 108 कमल की खेती की जा रही है। इस खेती से करीब एक लाख कमल के फूल निकलने की संभावना है। कमल के फूलों की धार्मिक आयोजनों, मंदिरों और पूजा-पाठ में मांग रहती है।
ऐसे में खेती सफल होने पर किसानों के लिए यह आय का नया माध्यम बन सकती है। फूलों के अलावा कमल के बीज और अन्य उपयोगी उत्पादों से भी आय की संभावनाएं हैं। बड़े स्तर पर खेती होने पर स्थानीय स्तर पर फूलों की तुड़ाई, छंटाई, पैकिंग और बाजार तक पहुंचाने से रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।
