त्योहारी सीजन से पहले चीनी हुई कड़वी: 1 महीने में 20 रुपये बढ़ी कीमत, रायबरेली में मिठाइयां तक हुईं महंगी
रायबरेली में चीनी की कीमतें एक महीने में 40 से 65 रुपये प्रति किलोग्राम हो गईं, जबकि सरसों का तेल 200 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है।

HighLights
चीनी का दाम एक महीने में 40 से 65 रुपये हुआ।
सरसों का तेल 170 से बढ़कर 200 रुपये प्रति लीटर पहुंचा।
बढ़ती महंगाई से गृहिणियों का रसोई बजट बिगड़ा।
जागरण संवाददाता, रायबरेली। चीनी (शक्कर) की कीमतों में तेजी से वृद्धि हो रही है। एक महीने में 20 रुपये प्रति किलोग्राम दाम बढ़कर 65 तक पहुंच गया। वहीं, सरसों का तेल भी 200 रुपये प्रति किलो के आंकड़े को छू चुका है।
महिलाओं का कहना है कि सरकार को कीमतों पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। बारिश के कारण सब्जियों की आवक में कमी आई है, जिससे सब्जियों के दाम भी बढ़ रहे हैं। जमुनापुर चौराहा के दुकानदार संतोष कुमार के अनुसार, एक महीने पहले चीनी 40 रुपये में बिक रही थी, जो अब 65 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है।
इसका असर चाय की दुकानों और मिठाई की दुकानों पर भी स्पष्ट दिखाई दे रहा है। त्योहारों के मौसम में महंगाई ने गृहिणियों को परेशान कर दिया है। सरसों के तेल के दाम भी 170 से 200 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गए हैं।
त्योहारी सीजन को देखते हुए चीनी का खर्च बढ़ गया है। महंगाई में सरकार का कोई नियंत्रण नहीं रह गया है, दाम लगातार बढ़ते जा रहे हैं और सरकार महंगाई थमने का ढिंढोरा पीट रही है। अब तो समान्य वर्ग के लिए पेट भरना भी भारी हो गया है
शाहीन बानो ऊंचाहार
रसोईया का बजट संतुलित रखने के लिए चीनी और तेल का उपयोग कम कर दिया है। महंगाई इसी तरह बढ़ती रही तो अन्य खर्चों में भी कटौती करनी पड़ेगी। सरकार को इसके बारे में जल्द कुछ न कुछ सोचना चाहिए।
रानी पाल दौलतपुर
चीनी की महंगाई से लोग परेशान हो रहे हैं। मध्य और अल्प आय वर्ग के परिवारों की भोजन की थाली महंगी हो गई है। किचन का बजट महंगाई से बिगड़ता जा रहा है। एक बार बढ़ी कीमत हमने का नाम नहीं ले रही है। चाय से लेकर पेड़ा बनाने में भी सौ बार सोचना पड़ता है।
सुनीता पाल दौलतपुर
अभी तक सब्जी के दामों को लेकर जलन सी महसूस हो रही थी। अब चीनी की महंगाई के चलते चाय समेत चीनी से बनने वाली मिठाइयों के बारे में सोचने पर विवस कर दिया है।
हस्मतुन निशा ऊंचाहार
