रायबरेली में दूसरे चरण में बनेंगी 178 डिजिटल लाइब्रेरी, 980 ग्राम पंचायतों में निर्माण की तैयारी
रायबरेली में दूसरे चरण में 178 ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी बनाई जाएंगी, जिससे ग्रामीण युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद मिलेगी।

दूसरे चरण में बनेंगी 178 डिजिटल लाइब्रेरी।
HighLights
दूसरे चरण में 178 ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी बनेंगी।
ग्रामीण युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मिलेगी मदद।
प्रत्येक लाइब्रेरी पर लगभग चार लाख रुपये का खर्च आएगा।
जागरण संवाददाता, रायबरेली। जिले के 980 ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी बननी है। यह कार्य कई चरणों में होगा। पहले चरण में 178 ग्राम पंचायतों का चयन किया गया था। दूसरे चरण में भी 18 ब्लाकों के 178 ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी बनाई जाएंगी। इससे ग्रामीण युवाओं को फायदा होगा।
प्रत्येक लाइब्रेरी में कंप्यूटर, प्रिंटर, यूपीएस व अन्य उपकरण लगाए जाएंगे। महापुरुषों की जीवनी से लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी तक की किताबें भी उपलब्ध कराई रहेंगी। बैठने के लिए कुर्सी मेज व बेंच रहेंगी।
इन सभी कार्यों के लिए प्रत्येक लाइब्रेरी पर करीब चार लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके संचालन की जिम्मेदारी सचिव व सहायक ग्राम पंचायत अधिकारी को दी जाएगी। लाइब्रेरी बनने से ग्रामीण युवाओं को बहुत फायदा होगा।
अभी तक इन ग्राम पंचायतों के युवाओं को मुख्यालय दूर कस्बा जाना पड़ता है। जिसके चलते उन्हें समय और पैसा दोनों खर्च करने पड़ते हैं। वहीं, अब उन्हें गांव में ही इसकी निश्शुल्क सुविधा मिलेगी। जहां, वह किसी भी समय लाइब्रेरी का इस्तेमाल कर सकेंगे। इससे उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में भी आसानी होगी।
ब्लाक शिवगढ़ निवासी शोभित ने बताया कि डिजिटल लाइब्रेरी बनने से गांव में ही प्रतियोगी किताबें पढ़ने को मिल जाएंगी। डीह निवासी सुरेश ने बताया कि अभी लाइब्रेरी के लिए 30 किलोमीटर दूर मुख्यालय जाना पड़ता है।
वहीं, डलमऊ के रहने वाले राजेंद्र ने बताया कि गांव में लाइब्रेरी की सुविधा मिलने से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में तेजी आएगी। यहां पर अखबार किताबें आसानी से पढ़ने के लिए मिल सकेंगी।
दूसरे चरण में 178 ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी बनेंगी। इससे ग्रामीण युवाओं को प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में आसानी होगी। पहले चरण में भी 178 ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी बनी थी। -विनय सिंह, डीपीआरओ।
