रायबरेली : पुलिस हाईटेक हो गई है। मगर, परंपरागत पुलिसिग अब भी कारगर है। बहुत सारे सनसनीखेज, संगीन मसले ऐसी पुलिसिग से सुलझाए भी जाते हैं। मगर, दो बच्चों की गुमशुदगी और फिर उनकी हत्या के मामले में लालगंज पुलिस पूरी तरह फेल रही। अगर समय रहते उस जंगल की छानबीन कर ली गई होती तो रूबी की न सही दीपक की जान जरूर बचा ली जाती।

बता दें कि जब 19 अगस्त को रूबी लापता हुई तो शुरुआत में पुलिस ने तेजी दिखाई। आसपास के कुएं, तालाब में छानबीन की गई। इसके लिए लखनऊ से पीएसी बुलाई गई। लेकिन, सफलता नहीं मिली। धीरे-धीरे पुलिस भी इस केस को लेकर ढीली होती चली गई। मगर, जब एक सितंबर को दीपक लापता हुआ तो महकमे के जिम्मेदार भी चौकन्ना हो गए। एक ही परिवार के दो बच्चे एक-एक करके आखिर कैसे गायब हो गए, इसकी छानबीन के लिए चार थानों की पुलिस के साथ ही एसओजी को लगाया गया। बड़े अधिकारी आए, बैठे सामान्य पूछताछ किए और चले गए। थानों की पुलिस का भी यही हाल रहा। मगर, गांव के लोगों ने बताया कि सिविल ड्रेस में आए पुलिस वाले इस मामले को लेकर बड़ी गहनता से जांच में जुटे। दिन-रात मेहनत की। तब पता चला कि आखिरी बार दीपक जंगल के पास अपने परिवार के कुछ लोगों के साथ देखा गया। तब जाकर जंगल में तलाश शुरू की गई।

अब बात ये आती है कि गांव के पास के उस जंगल की तरफ पुलिस का ध्यान कैसे नहीं गया। जब वहीं पास में इस परिवार के खेत हैं, जहां से इसी परिवार की श्यामकली दीपक के साथ घास उठाने गई थी। जब तालाब, कुएं खोज लिए वहां कुछ नहीं मिला तो कम से कम इस जंगल की तरफ निगहेबानी तो बनती ही थी। लेकिन, इस ओर बिलकुल भी ध्यान नहीं दिया गया। मतलब, हाईटेक पुलिस यानी एसओजी ने परंपरागत तरीका इस्तेमाल किया। वे भले ही बच्चों की जान नहीं बचा सके, पर अब ये साफ हो गया है कि कातिल पकड़े जाएंगे और पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा।

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