रायबरेली : कोरोना महामारी ने बहुत सारे परिवारों की खुशियां छीन लीं। ऐसी विषम परिस्थितियों में अनाथ और संकटग्रस्त बच्चों के लिए बाल सेवा योजना की शुरुआत की गई। प्रतिमाह चार हजार रुपये बच्चों की पढ़ाई और रहन-सहन के लिए सरकार दे रही है। ऐसे में अब इनकी ऑनलाइन या ऑफलाइन पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी, साथ ही पुस्तकें भी समय से खरीद सकेंगे। गुरुवार तक जिला प्रोबेशन विभाग में 51 संकटग्रस्त बच्चों की सूची तैयार की गई है। इनमें से एक भी बच्चा अनाथ नहीं है, इनके सिर्फ अर्जक (कमाने वाले) की कोविड की वजह से जान गई है। हालांकि अन्य मदद के नाम पर अभी तक सन्नाटा है।

केस-1

शहरी क्षेत्र में रहने वाले शख्स की 23 अप्रैल को कोविड से जान चली गई। सरकारी कॉलोनी में वे पत्नी, छह साल के बेटे और पांच साल की बेटी के साथ रहते थे। प्राइवेट जॉब थी। उनकी मौत के बाद पत्नी समझ ही नहीं पा रही थी कि परिवार कैसे चलेगा। बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी। गुरुवार को उन्हें बच्चों संग बुलाकर योजना के लाभार्थी होने का प्रमाण पत्र दिया गया तो उनको जीवन की नई राह दिखी। अब महिला, बच्चों के भविष्य को लेकर काफी हद तक निश्चित है।

केस- 2

लालगंज कस्बे में रहने वाले किसान की भी 23 अप्रैल को कोरोना से मौत हो गई थी। परिवार में पत्नी के अलावा 20 साल का बेटा और आठ साल की बेटी है। बेटा बीएससी कर रहा है। पत्नी गृहणी है। अब घर पर कमाने वाला कोई नहीं है। इस परिवार को भी योजना के तहत चुना गया है। बेटी की पढ़ाई का सारा खर्च अब सरकार वहन करेगी।

केस-3

हरचंदपुर के एक गांव निवासी किसान की 21 अप्रैल को मृत्यु हो गई। पीड़ित पिता भी 26 मई को महामारी की जद में आ गए। पिता-पुत्र की मौत के बाद परिवारजन का भविष्य अंधकारमय हो गया। किसान का बेटा घर पर छोटी परचून की दुकान चलाने लगा। बेटी दसवीं की छात्रा है। इस परिवार को योजना का लाभ दिया गया है।

योजना के तहत चयनित बच्चों के संरक्षकों के खाते में दस दिन के भीतर तीन माह की धनराशि यानी 12 हजार रुपये भेज दिए जाएंगे। ऐसे बच्चों के चिन्हीकरण का काम चल रहा है जोकि कोविड में अपने अर्जक या माता-पिता दोनों को खो चुके हैं।

कमलाकांत, जिला प्रोबेशन अधिकारी