रायबरेली : जिन यात्रियों की सहूलियत के लिए रेलवे की ओर से लगातार ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जा रही है, उन्हीं की संख्या में वृद्धि नहीं हो रही है। पहले जहां रेलगाड़ियों में चढ़ते समय धक्का-मुक्की होती थी, वहीं अब इक्का-दुक्का मुसाफिर दिखते हैं। कभी-कभी तो सन्नाटा ही पसरा रहता है।

रायबरेली रेलवे स्टेशन से होकर करीब 40 जोड़ी ट्रेनें आती-जाती थीं। तकरीबन 10 हजार मुसाफिर रोज यहां से आवागमन करते थे। लॉकडाउन हुआ तो सारी ट्रेनें बंद कर दी गईं। अब धीरे-धीरे इनका संचालन शुरू किया जा रहा है। अर्चना एक्सप्रेस, इंटरसिटी, पद्मावत, गंगा गोमती, नौचंदी समेत करीब आधा दर्जन से अधिक ट्रेनें स्पेशल बनकर फिर से दौड़ने लगी हैं। इसके अलावा प्रतापगढ़-कानपुर इंटरसिटी और प्रतापगढ़-लोकमान्य तिलक टर्मिनल सहित अन्य कई ट्रेनों को फरवरी से चलाने की तैयारी है। खास बात यह है कि ट्रेनें तो बढ़ रही हैं, लेकिन यात्रियों की संख्या में कोई खास वृद्धि होती नजर नहीं आ रही है। ऐसा नहीं कि मुसाफिरों की कमी है, बल्कि लोगों ने रिजर्वेशन के झाम के चलते रेलवे से दूरी बना ली है।

रेल कर्मियों को सहूलियत

जनरल टिकट की सुविधा शुरू न होने के कारण आम यात्रियों को खासा दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं। वह चाह कर भी ट्रेन का सफर नहीं कर पा रहे हैं। कम दूरी के लिए भी उन्हें रिजर्वेशन कराना पड़ता है। यही वजह है कि लोग ट्रेन की सवारी से कतरा रहे हैं। हालांकि, विभागीय पास पर यात्रा करने वाले रेल कर्मियों को इससे काफी सहूलियत मिली है।

इनकी भी सुनें

सबसे अधिक यात्री अनारक्षित टिकट पर सफर करने वाले ही होते थे। इस वक्त महामारी को देखते हुए आरक्षित टिकट पर ही यात्रा करने की अनुमति है। यही वजह है कि भीड़ नहीं हो रही है।

राकेश कुमार

स्टेशन अधीक्षक

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