उत्तर भारत में गहरा सकता है बिजली संकट, बारिश बनी कारण; एनटीपीसी ऊंचाहार की दो इकाइयां बंद
एनटीपीसी ऊंचाहार की दो इकाइयां बंद होने से बिजली उत्पादन घटकर 1130 मेगावाट रह गया है, जिससे उत्तर भारत में बिजली संकट गहरा सकता है।

एनटीपीसी परियोजना ऊंचाहार।
जागरण संवाददाता, ऊंचाहार (रायबरेली)। कोल आधारित एनटीपीसी परियोजना में पानी और कोयले से छह इकाइयों के जरिए 1550 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाता है, इनमें दो इकाइयां बंद बताई जा रही हैं। एक अनुरक्षण और दूसरी के स्विच यार्ड में पानी भरने के कारण से बंद है।
वहीं, लगातार हो रही बारिश से कोयला लाने वाली मालगाड़ियों का आवागमन भी आधा ही रह गया है, जिससे बिजली उत्पादन पर संकट आ सकता है। हालांकि, प्रबंधन द्वारा एक ही यूनिट के बंद होने व परियोजना में पर्याप्त मात्रा में कोयला भंडारण की बात कही जा रही है।
पूरे उत्तर भारत में होती है सप्लाई
एनटीपीसी में यूनिट एक से पांच तक 210-210 तो यूनिट छह 500 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता वाली हैं। यहां से उत्पादित बिजली उत्तरी ग्रिड के माध्यम से उत्तर प्रदेश समेत उत्तराखंड, राजस्थान, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल व जम्मू कश्मीर आदि प्रदेशों को भेजी जाती है।
एक यूनिट के बंद होने का सीधा असर इन सभी राज्यों पर पड़ता है। प्रबंधन द्वारा एक सप्ताह पूर्व 210 मेगावाट उत्पादन क्षमता वाली यूनिट पांच को वार्षिक अनुरक्षण के लिए बंद किया गया था। इसी बीच सोमवार को हुई भारी बारिश से यूनिट दो के स्विच यार्ड में जलभराव हो गया, जिससे उसे भी बंद करना पड़ा।
इसके बाद परियोजना का विद्युत उत्पादन घटकर 1130 मेगावाट रह गया है। हालांकि प्रबंधन द्वारा मंगलवार को पंपिंग सेटों से जल निकासी कराकर अनुरक्षण के बाद जल्द ही इस यूनिट को संचालित करने की बात कही जा रही है।
प्रतिदिन 30 हजार मीट्रिक टन कोयले की खपत
बता दें कि सभी यूनिटों के संचालक पर प्रतिदिन करीब 30 हजार मीट्रिक टन कोयले की खपत होती है। इसकी खातिर 58 से 60 वैगन ट्रिपलर (डिब्बे) वाली छह मालगाड़ियां प्रतिदिन यहां कोयला लेकर आती हैं, जिनमें प्रत्येक पर करीब 3500 से 4000 मीट्रिक टन कोयला रहता है। लगातार बारिश के बीच इन दिनों परियोजना में दो से तीन मालगाड़ियां ही पहुंच रही हैं।
परियोजना के मानव संसाधन विभाग के महाप्रबंधक पंकज अरोड़ा का कहना है कि यूनिट दो को स्विच यार्ड में पानी भरने से बंद किया गया है, यूनिट तीन के बंद होने की बात भ्रामक है।
परियोजना द्वारा यूनिट एक, तीन, चार व छह से उत्तरी ग्रिड की मांग के अनुरूप बिजली उत्पादन किया जा रहा है। पर्याप्त भंडारण होने से कोयला संकट जैसी कोई समस्या नहीं है।
