रायबरेली : जिस तरह धरती की कोख सूखती जा रही है, वह हर किसी के लिए चिता का विषय है। फिर भी जल संरक्षण के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। बड़ी इमारतों में रेन वाटर हार्वेस्टिग सिस्टम की याद हर साल बरसात में अफसरों को आती है, लेकिन अब तक धरातल पर काम कुछ नहीं हुआ। हाल यह है कि यहां सरकारी इमारतों में ही इसका अभाव है।

जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट हो या नगर पालिका परिषद का कार्यालय। विकास विभाग के आला हाकिम का जिस विकास भवन में कार्यालय है, वहां भी रेन वाटर हार्वेस्टिग सिस्टम नहीं लगा हुआ है। इसी परिसर में बीएसए ऑफिस के बगल में रेन वाटर हार्वेस्टिग प्लांट बना तो है, लेकिन वह सिर्फ दिखावे के लिए। शहर की ये इमारतें खासा बड़ी हैं। इनमें यह व्यवस्था हो जाए तो भारी मात्रा में बारिश के पानी को बचाया जा सकता है। जल संरक्षण के लिए वैसे तो सभी इमारतों में इसका निर्माण होना चाहिए, लेकिन इस दिशा में कागजी घोड़े दौड़ाए जाने के कारण कुछ परिणाम नजर नहीं आ रहे।

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घर में बनवाने पर कितनी आएगी लागत

50 - वर्ग मीटर क्षेत्रफल वाले घर के लिए 40 - हजार रुपये की लागत

03 - गड्ढों से वर्षाजल होगा शुद्ध 40 से 60 - फीट गहरी बोरिग (जलस्तर के हिसाब से)

04 - अधिकतम दिन में बनकर होगा तैयार 300 - लीटर बारिश का पानी स्टोर करके भूगर्भ में भेजने की क्षमता

नोट - यह तकनीकी जानकारी मनरेगा के तकनीकी कर्मचारियों से मिली

इनसेट आरडीए ने शुरू किया शहर में सर्वे आरडीए की ओर से 300 वर्ग मीटर एरिया में बनी इमारतों का चिन्हीकरण कराया जा रहा है। प्रभारी सचिव बीपी मौर्य ने बताया कि जितनी भी बड़ी इमारतें हैं, उनकी जांच कराई जाएगी। जहां रेन वाटर हार्वेस्टिग नहीं हैं, वहां बनवाने के निर्देश दिए जाएंगे।

इनसेट तीन जगह लग रहे रेन वाटर हार्वेस्टिग सिस्टम

नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी बीएम मिश्र ने बताया कि कलेक्ट्रेट, विकास भवन और नगर पालिका परिषद स्कूल में रेन वाटर हार्वेस्टिग सिस्टम का निर्माण जल्द ही कराया जाएगा। सुपर मार्केट की इमारत में इसके लिए जगह का अभाव है।

Edited By: Jagran