रायबरेली, संवादसूत्र। परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा का स्तर दिनोंदिन नीचे गिरता जा रहा है। स्कूलों में सरकार की मंशा के अनुरूप पठन पाठन नहीं कराया जा रहा है, जिसके चलते सुशिक्षित समाज की परिकल्पना मूर्तरूप नहीं ले पा रही है। शुक्रवार को जागरण टीम ने तीन सरकारी स्कूलों की पड़ताल की तो शैक्षणिक गुणवत्ता का सच सामने आ गया। पेश है रिपोर्ट 

प्राथमिक विद्यालय डलमऊ द्वितीय, डलमऊ 

अपरान्ह एक बजे स्कूल में सिर्फ पांच छात्र मौजूद थे। शैक्षणिक सत्र के तीन माह पूरे हो चुके हैं, लेकिन बच्चे अपने कापियों में चार-चार पन्ने ही लिख पाए हैं। कक्षा एक की रिया की कापी में सुलेख लिखा था, जिसमें कई गलतियां थीं, लेकिन अध्यापिका ने सब सही बताते हुए चेक कर दिया।

प्राथमिक विद्यालय मुस्तफाबाद ऊंचाहार 

अपरान्ह 1.20 बजे स्कूल की प्रधानाध्यापिका अंजू यादव खंड शिक्षाधिकारी कार्यालय गई हुई थी। कक्षा एक के छात्र आदर्श की हिंदी की कापी में गृहकार्य दिया गया था, जोकि गलत था। शिक्षिका उमा ने उसका नाम आदर्श के बजाए आर्दश लिखा और बच्चे ने भी वही कापी कर दिया। यही नहीं शिक्षिका ने उसे सही बताते हुए चेक भी कर दिया। छात्रा दुर्गा की हिंदी की कापी में भी कई गलतियां थीं, लेकिन शिक्षिका ने उसे भी सही से चेक नहीं किया था।

कंपोजिट विद्यालय सिंघौरतारा, सरेनी

अपरान्ह 2.05 बजे स्कूल में छुट्टी होने के बाद छात्र घर जाने की तैयारी कर रहे थे। कक्षा तीन की छात्रा शालिनी की गणित की कापी में जोड़-घटाना के सवाल सही से चेक नहीं किए गए थे। उसने 56 में 23 घटाए और उत्तर में 53 लिख दिया है, मतलब इस प्रश्न में पांच में से दो घटाने पर पांच लिख दिया गया। शिक्षक सुरेंद्र ने उसकी कापी चेक की और सही का टिक लगाकर हस्ताक्षर भी कर दिए। कक्षा छह के अवधेश यादव की हिंदी की कापी चेक ही नहीं की गई।

'बच्चों को बेहतर ढंग से शिक्षा दी जाए, इसके लिए समय-समय पर शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाता है। स्कूलों का निरीक्षण करके व्यवस्था परखी जाती है। जहां भी खामियां मिलती हैं, उन्हें दुरुस्त किया जाता है। काम में लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई होती है।    -डा. शिवेंद्र प्रताप सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी 

Edited By: Anurag Gupta

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