रायबरेली : डलमऊ स्थित पंप कैनाल चलाने को अधिकारियों की भारी भरकम टीम है। इसके बाद भी किसान पानी को मोहताज हैं। मनमानी के कारण पंप कैनाल शायद ही कभी पूरी क्षमता से चलता होगा। इसका खामियाजा इसके सहारे खेती करने वाले अन्नदाताओं को भुगतना पड़ता है। सैकड़ों गांवों के हजारों किसानों के खेतों में दरारें पड़ रही हैं, लेकिन पीड़ा सुनने वाला कोई नहीं है। सिचाई विभाग के शारदा सहायक खंड-छह के जिम्मे सिर्फ डलमऊ पंप कैनाल, बक्सर (उन्नाव) स्थित पंप कैनाल के संचालन की जिम्मेदारी है। इसके लिए एक अधिशासी अभियंता, तीन सहायक अभियंता और 22 अवर अभियंता के पद सृजित हैं। इसमें अवर अभियंता मात्र 11 हैं। विभाग के दक्षिणी खंड की डिमांड पर पंप चलाए जाते हैं। इससे पानी गंग नहर में छोड़ा जाता है। जगतपुर, ऊंचाहार तक गंग नहर से जुड़ी माइनर, रजबहों में पानी छोड़े जाने का प्रावधान है, लेकिन ज्यादातर में झाड़ियां उगी हैं और धूल उड़ रही है। अधिकारी मांग के अनुसार पंप चलने का दावा करते हैं, जबकि रजबहे, माइनर में पानी न होने से हर तरफ मांग की जा रही है। पंप कैनाल से सिचाई की स्थित

गांवों की संख्या- 600

किसान- 35 हजार

माइनर व रजबहे- 28

असिचित क्षेत्रफल- 10 हजार हेक्टेयर इस समय 12 पंप चलाए जा रहे हैं। लो-वोल्टेज की बहुत ज्यादा समस्या आ रही है। इससे पंप चलाने में परेशानी हो रही है। वोल्टेज कम होने पर जो पंप चल रहे हैं, वह भी बंद हो जाते हैं। सभी जगह पानी पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

एके सिंह, अधिशासी अभियंता शारदा सहायक खंड-छह