डलमऊ : पतित-पावनी गंगा का जल स्नान योग्य नहीं है। यह हम नहीं कह रहे बल्कि, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में ये तथ्य सामने आए हैं। वहीं, सुधार की कवायद रोजाना जांच तक सीमित है।

धर्मनगरी डलमऊ के किनारे से गंगा नदी प्रवाहित है। विशेष पर्व पर यहां लाखों की संख्या में श्रद्धालु स्नान करते हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से नदी के जल की निगरानी की जाती है। प्रतिदिन टीम द्वारा सैंपल लेकर जांच की जाती है और इसकी रिपोर्ट भी बोर्ड को भेजी जाती है। सितंबर में आई जांच रिपोर्ट में जल की गुणवत्ता डी की श्रेणी बताई गई थी। बोर्ड के जूनियर रिसर्च फेलो नागमणि ने बताया कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा नदी के जल की गुणवत्ता परखने के लिए मानक निर्धारित किए गए हैं। इसमें पांच श्रेणियां हैं। ए और बी श्रेणी का जल सबसे अच्छा होता है। सी श्रेणी का पानी स्नान के काबिल होता है, लेकिन पीने योग्य नहीं होता। वहीं, डी श्रेणी का पानी इन दोनों के लायक नहीं होता, जबकि ई श्रेणी होने पर जलीव जीवों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। कारण, इसमें आक्सीजन की मात्रा काफी कम रहती है। नदी के जल को दूषित कर रहे ये नाले

नगर में सड़क घाट, पथवारी देवी घाट, दीनशाह गौरा घाट, महावीर घाट, शुकुल घाट, बरुद्दाघाट, मठ घाट, श्मशान घाट पर नाले का पानी गंगा नदी में गिरता है। पड़वा नाले का पानी भी इसी नदी में गिराया जा रहा है। इसका असर भी नदी के पानी पर पड़ रहा है। -----------

स्वच्छ भारत मिशन के जिला कार्यक्रम प्रबंधक के आने का इंतजार है। उनके आने के बाद प्राकृतिक विधि से नालों के पानी को शोधित करने की रूपरेखा बनेगी और उस पर खर्च होने वाला बजट भी तय होगा। योजना को धरातल पर लाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

आरती श्रीवास्तव, अधिशासी अधिकारी, नगर पंचायत डलमऊ

Edited By: Jagran