चार माह बीते, बच्चों को नहीं मिली किताबें

- जुलाई माह में नई किताबों की आई एक खेप, उसका भी नहीं हो सका वितरण - पुराने छात्रों से किताबें लेकर नए छात्रों को पढ़ाई कराने के दिए गए थे निर्देश जागरण संवाददाता, रायबरेली : शिक्षण सत्र अप्रैल में शुरू हुआ, जुलाई बीतने को है। इसी के साथ सत्र शुरू हुए चार माह बीत जाएंगे, लेकिन अभी तक परिषदीय विद्यालयों में छात्रों को पढ़ने के लिए किताबें नहीं आ सकी। कुछ छात्र तो पुराने सीनियर छात्रों से पुस्तक मांग कर शिक्षा हासिल कर रहे हैं। वहीं तमाम ऐसे भी छात्र हैं जो बिना किताबों के स्कूल पहुंचते हैं और बिना किताब के दिन भर पढ़कर घर लौट आते हैं। गुरुवार दैनिक जागरण टीम ने स्कूलों की पड़ताल की तो कुछ ऐसी ही हकीकत सामने आई। नई किताबें न होने से छात्रों को न ही पाठ्यक्रम की जानकारी हो पा रही है और न ही बेहतर शिक्षा मिल पा रही है। - जो आईं वह भी बनी गोदाम की शोभा जिले के परिषदीय विद्यालयों के छात्रों को बंटने के लिए 21,30,305 किताबें आनी हैं। किताबों की पहली खेप चार जुलाई को आई है, जिसमें कक्षा छह की अक्षरा की 40,214, और इंग्लिश रीडर की 40,214 किताबें शामिल हैं। इन किताबों को राही स्थित गोदाम में रखवा दिया गया है, लेकिन अभी यह छात्रों तक नहीं पहुंच सकी हैं। किताबों को ब्लाक और फिर ब्लाक से स्कूलों तक पहुंचाने के लिए कराई जा रही टेंडर प्रक्रिया भी अभी पूरी नहीं हो सकी है। केस-एक समय : सुबह 9.03 बजे। प्राथमिक विद्यालय डीह प्रथम में 332 बच्चे नामांकित हैं, जिसमें गुरुवार को 156 बच्चे विद्यालय में पढ़ाई के लिए आए हुए थे। विद्यालय में नई पुस्तकें न आने की वजह से बच्चे बिना पुस्तकों के ही पढ़ाई कर रहे थे। प्रधानाध्यापक सुशील सिंह ने बताया कि अभी नई पुस्तकें नहीं मिली है। केस-दो समय : सुबह 11.17 बजे। प्राथमिक विद्यालय पूरे गोसाई में 220 बच्चे नामांकित है, जिसमें गुरुवार को 110 बच्चे पढ़ाई के लिए उपस्थित रहे। नई पुस्तकें न आने की वजह से बच्चे बिना पुस्तक के ही पढ़ाई करने को मजबूर है। प्रधानाध्यापक चंद्रकांत श्रीवास्तव ने बताया कि अभी पुस्तकें नहीं आई हैं। केस-तीन समय : सुबह 10 बजे। प्राथमिक विद्यालय बछरावां में पंजीकृत 270 छात्रों के सापेक्ष 157 छात्र उपस्थित रहे। विद्यालय में नौनिहाल पुरानी किताबों से अध्ययन करते मिले। प्रधानाध्यापक बीपी अवस्थी ने बताया कि नए शैक्षिक सत्र की किताबें उपलब्ध नहीं हो पाई हैं। पूर्व में अध्यनरत छात्रों से किताबें जमा कराई गई थी। जिनकी मदद से छात्रों को पढ़ाया जा रहा है। वर्जन, किताबों की दूसरी खेप नहीं आई है। किताब जिले में पहुंचाने का 90 दिन का समय होता है और किताबें आ सकें, इसके लिए लगातार संपर्क किया जा रहा है। संजीव गुप्ता, जिला समन्वयक सामुदायिक सहभागिता

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