रायबरेली : परिषदीय विद्यालयों में नवनियुक्त शिक्षकों के विद्यालय आवंटन की तिथि तय कर दी गई है। इसके लिए मानक भी निर्धारित कर दिए गए हैं। विद्यालय आवंटन में पारदर्शिता का दावा किया जा रहा है, लेकिन हकीकत इससे जुदा है। मनमाफिक विद्यालय मिले, इसके लिए हर कोई पूरी ताकत झोंके हुए है। कहां कैसे जुगाड़ लगेगा, इसको लेकर दांव आजमाए जा रहे हैं। वहीं, दफ्तर में भी इसकी चर्चाएं तेज हो गई हैं। महत्वपूर्ण सीटों पर गुपचुप तरीके से भरोसा भी दिलाया जाने लगा है। इनसेट

अपने ही लगा रहे दाग, कहीं न पड़ जाए भारी

बीएसए भले ही पाक-साफ होने का दावा कर रहे हों, लेकिन उनके अपने ही दाग लगाने में नहीं चूक रहे हैं। शैक्षिक प्रमाणपत्र में नाम में त्रुटि आदि होने पर 45 दिन के लिए अनुमति नवनियुक्त शिक्षकों द्वारा मांगी जा रही है। इसके लिए भी आठ से 10 हजार रुपये तक वसूले जा रहे। एक नवनियुक्त शिक्षक का कहना है कि सिर्फ नाम के स्पेलिग में कुछ कमी है। बाबूजी ने 10 हजार ले लिए। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब छोटे से काम के लिए इतनी बड़ी रकम ले ली जा रही है, तो स्कूल आवंटन में क्या हाल होगा? यह है कमेटी शासन से मिले निर्देश के तहत बीएसए के अलावा जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान प्राचार्य, जीआइसी, जीजीआइसी प्रधानाचार्य और डीएम द्वारा नियुक्त अधिकारी को जिला स्तरीय कमेटी में शामिल किया गया है।

इनकी सुनें कोई किसी के बहकावे में न आए। विद्यालय आवंटन नियमानुसार ही किया जाएगा। यदि किसी के नाम में स्पेलिग मिस्टेक आदि है तो सीधे आकर मिले, जो उचित होगा? समाधान किया जाएगा

आनंद प्रकाश शर्मा, बीएसए

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