रायबरेली : डॉक्टरों की ढिठाई तो देखिए। सीएमओ का आदेश भी इनको नहीं मानना। ओपीडी खोलने की बात तो छोड़ दीजिए, अल्टीमेटम मिलने के बाद भी कोई डॉक्टर सीएचसी नहीं आया। अभी भी यहां पर फार्मासिस्ट ही मरीजों का उपचार कर रहे हैं।

हम बात कर रहें हैं रोहनिया सीएचसी की, जहां पर 30 बेड का कोविड अस्पताल खोला जाना है। यहां व्याप्त अव्यवस्थाओं को लेकर दैनिक जागरण ने प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी। इसका संज्ञान लेकर सीएमओ डॉ. वीरेंद्र सिंह ने सोमवार को अस्पताल का निरीक्षण किया था। इस दौरान यहां के अधीक्षक डॉ. राजेंद्र प्रसाद समेत चारों चिकित्सक और एक स्टाफनर्स गैर हाजिर थी। उन्होंने सभी का वेतन रोककर स्पष्टीकारण मांगा। साथ ही ऊंचाहार सीएचसी के अधीक्षक डॉ. एमके शर्मा को निर्देशित किया कि दो दिनों के भीतर यहां ओपीडी शुरू करा दी जाए। शनिवार की सुबह 11 बजे अस्पताल में सिर्फ वार्डब्वॉय सुनील कुमार और एक्सरे टेक्नीशियन अशोक कुमार ही मौजूद मिले। न तो वे चारों डॉक्टर ही ड्यूटी पर आए और न ही स्टाफनर्स और फार्मासिस्ट। रोहनिया गांव के रतीपाल पासवान, उमरन गांव के सीतला, रामलखन, राकेश सिंह, पूरे बेचू गांव के मान सिंह ने बताया कि सीएचसी में अक्सर ताला लटका मिलता है। इसी वजह से यहां मरीजों ने जाना ही बंद कर दिया है। पहले की तरह अभी भी सब ऊंचाहार सीएचसी में ही इलाज कराने जाते हैं, जोकि यहां से करीब आठ किमी दूर है।

सीएचसी अधीक्षक ऊंचाहार डॉ. एमके शर्मा ने बताया कि दो दिनों में ओपीडी शुरू करनी थी। इस संबंध में वहां के अधीक्षक को सूचना भेजी जा चुकी है। अभी भी सेवाएं शुरू नहीं हो सकी हैं, इस संबंध में उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा जाएगा।

वर्जन,

रोहनिया के अधीक्षक ही वहां ड्यूटी नहीं करना चाह रहे हैं। शासन की मंशा के अनुरूप जो काम नहीं करेंगे, उन पर कार्रवाई की जाएगी।

डॉ. वीरेंद्र सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी

Edited By: Jagran