रायबरेली : कोरोना की पहली और दूसरी लहर में संक्रमितों को जिला अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया। उन्हें एल-2 हॉस्पिटल रेलकोच या फिर एल-3 फैसिलिटी सेंटर एम्स, दरियापुर भेजा गया। तीसरी लहर की आशंका के मद्देनजर पहली बार इस अस्पताल को जरूरी चिकित्सीय संसाधनों से लैश किया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर यहीं मरीजों को भर्ती करके उनका उपचार किया जाएगा।

जिला अस्पताल में कुल 270 बेड हैं। इनमें से 50 पर पहले से ऑक्सीजन की सेंट्रल पाइप लाइन लगी है। सांसद सोनिया गांधी की निधि से 170 बेडों को सेंट्रल लाइन से जोड़ने का काम चल रहा है, जो कि आठ से दस दिनों में पूरा हो जाएगा। 15 बेड का पीडियाट्रिक वार्ड तैयार है, जिसमें सभी बेडों पर वेंटिलेटर लगाया गया है। 500 एलपीएम का ऑक्सीजन प्लांट पहले से लगा है। डीआरडीओ की ओर से यहीं पर एक हजार एलपीएम क्षमता का एक और प्लांट लगाया जा रहा है, जिसे अगस्त में ही संचालित करने की तैयारी है। यहां करीब 30 डॉक्टरों संग करीब 150 चिकित्सीय कर्मियों का स्टाफ है। एंटीजन और ट्रू नॉट जांच की व्यवस्था है। आरटी पीसीआर जांच के लिए सैंपलिग भी की जा रही है। लगभग 150 ऑक्सीजन सिलिडर और छह कंसंट्रेटर पहले से हैं।

नहीं करनी होगी दौड़ भाग

कोरोना की दो बार लहर आई और मरीजों को कोविड अस्पतालों में भर्ती होने के लिए बहुत दौड़भाग करनी पड़ी। दूसरी लहर में जब बड़ी संख्या में लोगों की जान गई, तभी ये चर्चा उठी कि आखिरकार जिला अस्पताल में संक्रमितों के इलाज की व्यवस्था क्यों नहीं की गई। महिला अस्पताल की पुरानी बिल्डिग खाली होने के बावजूद कठिन दौर में उसका उपयोग क्यों नहीं किया गया। गहन मंथन के बाद जिला अस्पताल को भी कोविड अस्पताल के रूप में तैयार किया जा रहा है, ताकि मरीजों को इलाज में दिक्कत न हो।

जिला अस्पताल में पर्याप्त चिकित्सक व स्टाफ है। एक हजार एलपीएम का ऑक्सीजन प्लांट भी जल्द शुरू हो जाएगा। कोरोना की तीसरी लहर आती है तो जरूरत पड़ने पर इसे भी कोविड अस्पताल बनाया जा सकता है।

डॉ. एनके श्रीवास्तव, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक

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