रायबरेली : वैसे तो नहर, माइनर और रजबहे की सफाई की जिम्मेदारी सिचाई विभाग की है। इसके लिए लाखों रुपये पानी की तरह बहाए जाते हैं। जनपद में कई ऐसे मौके आए, जब अन्नदाताओं की पीड़ा जिम्मेदारों ने नहीं सुनी तो खुद फावड़ा उठा लिया। शिवगढ़, जगतपुर, ऊंचाहार में कई ऐसी माइनर और रजबहे हैं, जिन्हें सिचाई विभाग ने नहीं बल्कि आपसी सहयोग या फिर श्रमदान से साफ किया गया। किसानों ने खुद जिम्मेदारी उठाकर प्रशासनिक को आईना दिखाया। केस-एक

जगतपुर क्षेत्र की शंकरपुर माइनर से दौलतपुर, उमरी, पूरबगांव, लल्लू का पुरवा, भटपुरवा समेत कई गांवों के किसान सिचाई करते हैं। पहले सफाई के लिए अफसरों से कहा। किसी ने नहीं सुनी तो सभी ने चंदा एकत्र किया और 17 जून को माइनर की सफाई कराई। इसके बाद पानी इन किसानों के खेतों में पहुंच सका। केस-दो

ऊंचाहार-लबेदवा माइनर झाड़ियों से घिरी थी। भारी मात्रा में बालू भी जमा थी, जिससे पांच किमी लंबी इस माइनर के अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंच पा रहा था। अफसरों ने अनदेखी की तो पांच गांवों के 150 किसानों ने श्रमदान करके खुद माइनर की सफाई दो दिन में कर ली। केस- तीन

शिवगढ़ के पिडौली, बेडारू समेत कई गांवों के किसानों के लिए सिचाई का साधन पिडौली ड्रेन है। सिचाई विभाग द्वारा इसकी सफाई न कराए जाने से किसानों ने आपस में चंदा एकत्र किया था और फिर उसकी सफाई कराई।

समय-समय पर सभी माइनरों और नहरों की सफाई का कार्य कराया गया है। किसानों की मांग पर भी कई जगह माइनर और रजबहों की सफाई कराई गई।

हेमंत वर्मा, अधिशासी अभियंता सिचाई विभाग