रायबरेली : मिशन शक्ति के तीसरे चरण की शुरुआत 21 अगस्त को की गई। 54 दिनों में 5261 मनचलों ने छेड़छाड़ न करने की कसम खाई और शपथपत्र दिया। पुलिस ने छींटाकशी के 53 मामलों का खुद संज्ञान लिया और केस दर्ज कराया। 85 बदमाशों पर गुंडा एक्ट की कार्रवाई हुई और महिलाओं के उत्पीड़न करने के मामले में 526 का शांतिभंग की आशंका में चालान किया गया।

महिला सुरक्षा, स्वावलंबन और सम्मान की रक्षा के लिए 17 अक्टूबर 2020 को इस अभियान की शुरुआत शारदीय नवरात्रि पर की गई थी। इसके पहले दोनों फेज के दौरान कोरोना महामारी का साया रहा। बावजूद इसके, पुलिस अफसर क्षेत्र में निकले और आधी आबादी को परेशान करने वालों पर कार्रवाई की। तीसरा चरण अगस्त में शुरू किया गया और थीम रखी गई, चलो गांव की ओर। अच्छी बात ये है कि संक्रमण का दौर लगभग खत्म हो चुका है। स्कूल और कालेज खुल चुके हैं। बाजारों में भी चहल-पहल बढ़ गई। इस कारण अब मिशन शक्ति अभियान से जुड़ी पुलिस टीमों की चुनौतियां भी बढ़ गई हैं। पीड़िता नहीं, पुलिस बनी वादी

तीसरे चरण में दो माह से कम समय में पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्रवाई की। राह चलते छींटाकशी करने वालों पर पुलिस ने खुद आइपीसी की धारा 294 के तहत केस दर्ज कराया और कार्रवाई की। बहुत बार ऐसा होता आया है कि युवती या महिला ऐसी घटनाओं को नजरअंदाज कर देती हैं। पुलिस को सूचना नहीं देतीं, न ही केस दर्ज कराती हैं। पुलिस के फ्रंट पर आने से अब उन्हें भी न्याय मिलने लगा है।

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तीसरे चरण में 467 गांवों में मिशन शक्ति कक्ष स्थापित करके प्रत्येक सप्ताह वहां चौपाल लगाई जा रही है। महिलाओं को जागरूक करने के लिए 536 सम्मेलन किए जा चुके हैं। दुष्कर्म और छेड़छाड़ करने वाले तीन आरोपितों को कोर्ट से सजा भी दिलाई जा चुकी है।

विश्वजीत श्रीवास्तव, अपर पुलिस अधीक्षक

Edited By: Jagran