रायबरेली : नमकीन का सैंपल सेंट्रल लैबोरेटरी भेजने के एवज में 50 हजार रुपये घूस मांगने की जांच खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग में बुधवार को शुरू हो गई। लखनऊ से सहायक आयुक्त अपरान्ह रायबरेली पहुंची और विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों के बयान लिये। साथ ही कार्यालय आए व्यापारियों के भी आरोपों को अपनी रिपोर्ट में शामिल किया।

सहायक आयुक्त शशि पांडेय अपरान्ह लगभग एक बजे एफएसडीए आफिस पहुंची। यहां मौजूद मुख्य अभिहित अधिकारी शशांक त्रिपाठी, जेपी त्रिपाठी, अरुण कुमार, सिद्धार्थ कुमार सहित सभी एफएसओ से 30 मई को हुई रिश्वतखोरी के संबंध में उन्होंने पूछताछ की। साथ ही विभागीय कार्यों की समीक्षा भी की। सहायक आयुक्त के प्रश्नों के उत्तर जिम्मेदारों ने दिए जरूर लेकिन अधिकारी उनके जवाब से संतुष्ट नहीं दिखी। हालांकि इस बाबत सहायक आयुक्त ने कुछ भी बोलने से इंकार किया। उन्होंने जांच के दौरान कार्यालय में मौजूद व्यापारी नेताओं का पक्ष भी सुना। व्यापारी नेता बसंत ¨सह बग्गा ने कहा कि रिश्वतखोरी के जिस मामले में संजय बाबू को जेल भेजा गया, उसमें शशांक त्रिपाठी और अरुण कुमार भी बराबर के भागीदार हैँ। इनका नाम भी मुकदमे में शामिल है तो इनकी गिरफ्तारी क्यों नहीं की जा रही है। आरोप लगाया कि मुख्य अभिहित अधिकारी लखनऊ तक पहुंच होने की बात कहकर व्यापारियों को डरा धमकाकर वसूली करते हैं। उन पर कार्रवाई न हुई तो व्यापारी लखनऊ कूच करने को बाध्य होंगे। वहीं मौजूद दूसरे व्यापारी गुट ने मुख्य अभिहित अधिकारी को ईमानदार बताते हुए उनका पक्ष लिया।

लगभग छह घंटे तक सहायक आयुक्त विभाग में डटी रहीं। उन्होंने विभाग के हर शख्स से इस संबंध में पूछताछ की। व्यापारियों द्वारा लगाए गए आरोपों को भी रिपोर्ट में शामिल किया। उसके बाद शाम लगभग सात बजे वह लखनऊ रवाना हो गई।

सहायक आयुक्त बोलीं,

इस प्रकरण की जांच के लिए मुझे भेजा गया। प्रारंभिक जांच के बाद रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंपी जाएगी। वही इसे सार्वजनिक करेंगे कि आखिर इसमें कौन दोषी है और कौन निर्दोष।

शशि पांडेय, सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग ये है मामला

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग में तैनात कनिष्ठ लिपिक संजय कुमार को 30 मई को एंटी करप्शन यूपी की टीम ने 50 हजार रुपये घूस लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। लालगंज निवासी व्यापारी विजय रस्तोगी ने घूस मांगने की शिकायत एंटी करप्शन में की थी। उनका कहना था कि उनकी कंपनी में बनी नमकीन का नमूना आगरा लैबोरेटरी में फेल हो गया। इसी सैंपल को दोबारा जांच के लिए सेंट्रल लैबोरेटरी गाजियाबाद भेजने के लिए उसने एप्लीकेशन दी थी। सैंपल भेजने के नाम पर उसस रिश्वत मांगी गई थी। जिसमें संजय बाबू के साथ ही शशांक त्रिपाठी और अरुण कुमार भी शामिल हैं।

मुक्ष्य अभिहित अधिकारी बोले,

मेरे ऊपर लगाए जा रहे सारे आरोप बेबुनियाद हैं। सहायक आयुक्त ने जांच की है। जल्द ही सारे मामले से पर्दा उठ जाएगा। कुछ व्यापारी नाहक ही मेरे और एफएसओ अरुण कुमार के ऊपर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

शशांक त्रिपाठी, मुख्य अभिहित अधिकारी

By Jagran