रायबरेली : मनरेगा में सोमवार को दो ²श्य देखने को मिले। सुबह हक पाने के लिए ब्लॉक और जिला मुख्यालय पर कार्य बहिष्कार का ऐलान करते हुए कर्मी राजधानी रवाना हो गए। दफ्तरों में सन्नाटा पसरा रहा। दूसरा ²श्य गांवों में काम करते श्रमिकों का रहा, जिन्हें आपदा के दौर में परिवार पालने की चिता सता रही है। यही वजह है कि फावड़ा लेकर काम करने पहुंच गए। ऐसे में इक्का-दुक्का स्थानों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश जगह काम हुआ। अधिकारियों का कहना है कि कार्य बहिष्कार से कार्यालय संबंधी कुछ कार्य प्रभावित हुए हैं।

मस्टररोल फीडिग, भुगतान और नए कार्यों का इस्टीमेट प्रभावित

लालगंज बीडीओ केके सिंह का कहना है कि जिन ग्राम पंचायतों में मनरेगा से कार्य चल रहा था, वहां मेट की देखरेख में होता रहा। इसी तरह हरचंदपुर और सतांव बीडीओ राजेश बहादुर सिंह, राही के जैनिथकांत, महराजगंज के प्रवीण कुमार द्वारा मेट की देखरेख में काम होने का दावा किया गया। हालांकि कर्मियों के नहीं आने से मस्टर रोल फीडिग, श्रमिकों का भुगतान व नए कार्यों का इस्टीमेट बनाने आदि का कार्य जरूर प्रभावित हुआ। उधर, लालगंज एपीओ सचिन पाठक ने कार्य प्रभावित होने की बात कही। ग्राम पंचायत तौधकपुर, चांदा व आलमपुर में प्रधानों ने मनरेगा का कार्य बंद होने का दावा किया है।

काम ठप होने से मायूस लौटे श्रमिक

ऊंचाहार के कोटिया चित्रा, दौलतपुर, रामसांडा गांव में कार्य प्रभावित रहा। रोहनिया बीडीओ विजयंत कुमार सिंह ने कार्य ठप होने की बात कही। डीह बीडीओ जितेंद्र सिंह ने बताया कि 40 में से 31 ग्राम पंचायतों में काम चल रहा है। जगतपुर बीडीओ जितेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि 39 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें से 37 में कार्य चल रहा है। दो ग्राम पंचायतों में मजदूरों के कार्य दिवस पूर्ण हो जाने से काम बंद है। कार्य नहीं होने से श्रमिकों को मायूस होना पड़ा।

मनरेगा कर्मियों के कार्य बहिष्कार का कोई खास असर नहीं पड़ा। अधिकांश जगहों पर पहले की ही तरह श्रमिक पहुंचे। प्रधान और मेट की देखरेख में काम हुआ।

एसएन चौरसिया, जिला विकास अधिकारी

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