रायबरेली, जेएनएन। कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा मंगलवार को अपनी मां के संसदीय क्षेत्र रायबरेली पहुंची। संप्रग तथा कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली के एक दिन के दौरे में उनकी बेटी प्रियंका गांधी ने केंद्र के साथ राज्य सरकार पर बड़ा हमला बोला है।  

रेल कोच फैक्ट्री, लालगंज पहुंचीं कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा ने निगमीकरण के विरोध में दो माह से आंदोलनरत कर्मचारियों के सभा को संबोधित किया। प्रियंका ने लगभग एक घंटे तक कर्मचारी नेताओं को सुना। उसके बाद सरकार पर बरसीं। उन्होंने कर्मचारियों और क्षेत्र की जनता को भावनात्मक रूप से जोडऩे का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि कहा कि मेरी माँ सोनिया गांधी ने यह फैक्ट्री शुरू कराई तो उन्हें खुशी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि इसलिए हुई कि यहां की जनता को रोजगार मिला। मगर, भाजपा सरकार क्या करने जा रही है। यह फैक्ट्री फायदे में चल रही है, फिर भी इसका निगमीकरण किया जा रहा है।

प्रियंका ने कहा कि सरकार अभी निगमीकरण और फिर निजीकरण करेगी। यही सरकार की योजना है कि एक एक कर ऐसी सभी फैक्टरियों को अपने उद्यमी मित्रों को सौंप दिया जाए। कांग्रेस महासचिव ने जनता की ओर सवाल उछाला कि सोचिए, निगमीकरण की शुरुआत रायबरेली से ही क्यों की जा रही है। यह राजनीति से ऊपर की बात है। इस सरकार के लिए रायबरेली की जनता नहीं, राजनीति ज्यादा महत्वपूर्ण है। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और क्षेत्र की सांसद व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के संघर्षों का हवाला देते हुए प्रियंका ने आश्वस्त किया कि आप जब भी बुलाएंगे, मैं सड़क पर संघर्ष के लिए आऊंगी। वादा है कि रेल कोच फैक्ट्री का निगमीकरण नहीं होने दिया जाएगा।

30 मिनट बातचीत की मुलाकात 

वह लखनऊ से सड़क मार्ग से चलकर रायबरेली पहुंची। यहां प्रियंका गांधी सीधा लालूपुर में पूर्व विधायक स्वर्गीय अखिलेश सिंह के गांव पहुंची। जहां पर पूर्व विधायक अखिलेश सिंह की पत्नी वैशाली सिंह, उनकी बेटी सदर विधायक अदिति सिंह और दिव्यांशी सिंह से मिलकर दुख बांटा और कहा कि हम सब आपके साथ हैं। अमावां ब्लॉक अन्तर्गत लालूपुर गांव में सुबह कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा पहुंच गईं। वहां पांच बार के सदर विधायक रहे अखिलेश सिंह के परिजनों से मिलीं। पूर्व विधायक की बेटी व मौजूदा सदर विधायक अदिति सिंह से उन्होंने करीब 30 मिनट बातचीत की। दुख की घड़ी में साथ रहने की बात दोहराई। उसके बाद वे वहां से भुएमऊ गेस्ट हाउस चली गईं। प्रियंका वाड्रा करीब 47 मिनट के अपने कार्यक्रम में मीडिया से दूर रहीं। 

धरने पर बैठे रेलकोच फैक्ट्री के कर्मचारियों से बात की
प्रियंका वाड्रा भुएमऊ गेस्ट हाउस के बाहर राजीव गांधी विकास परियोजना से जुड़ी महिलाओं से मिलीं। इसके बाद दोपहर आधुनिक रेलकोच फैक्ट्री लालगंज, ऐहार के लिए पहुंची। 

इस दौरान वह रेलकोच के बाहर निगमीकरण के विरोध में धरने पर बैठे रेलकोच फैक्ट्री के कर्मचारियों के विरोध में शामिल भी हुईं और कर्मचारियों से बात की। यह कारखाना उनकी मां सांसद सोनिया गांधी का ड्रीम प्रोजेक्ट है।आधुनिक रेलकोच कारखाना में दो माह से कर्मचारी निगमीकरण के विरोध में आंदोलनरत हैं। विभिन्न दलों का वहां के आंदोलन कारियों को सहयोग व समर्थन मिल रहा है। मंगलवार को बारी कांग्रेस की रही। तेज तर्रार नेता प्रियंका वाड्रा इस आंदोलन में शामिल हुई। सरकार के निर्णय का विरोध किया।  

 

लालगंज के ऐहार में बने रेलकोच कारखाने का इतिहास भी कम रोचक नहीं है। जब केंद्र में संप्रग सरकार थी और राज्य में बसपा की। तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने यहां रेलकोच के लिए जमीन देने से इंकार कर दिया था। काफी रार हुई थी। बाद में जमीन मिली और कारखाने का निर्माण भी शुरू हुआ। जब यहां उत्पादन शुरू हो गया और प्रधानमंत्री खुद यहां आकर काम की तारीफ कर गए। तो उसके बाद निगमीकरण के प्रस्ताव ने यहां के कर्मचारियों को चिंता में डाल दिया। एक बार फिर कांग्रेस रेलकोच कर्मियों के पक्ष में खड़े होकर सरकार से दो-दो हाथ करने की तैयारी में जुट गई है। 

चला रायबरेली का दांव
कांग्रेस महासचिव ने सरकार के खिलाफ एक और दांव चला। जनता की ओर सवाल उछाला कि सोचिए, निगमीकरण की शुरुआत रायबरेली से ही क्यों की जा रही है? सरकार के लिए आप नहीं, राजनीति ज्यादा महत्वपूर्ण है। फिर आश्वस्त किया कि आप जब भी बुलाएंगे, मैं आऊंगी। नेता विधानमंडल दल अजय कुमार लल्लू ने भी लगातार संघर्ष की बात कही।

Posted By: Dharmendra Pandey

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