यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 06, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
सिर्फ लड़ाने का काम करती हैं सपा व भाजपा : सतीश चंद्र मिश्र
सतीश चंद्र मिश्रा ने भाजपा और सपा को एक ही सिक्के के पहलू बताते हुए आरोप लगाया कि दोनों पार्टियां समाज को आपस में लड़वाकर वोट की राजनीति करती हैं।

रायबरेली (जेएनएन)। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में जोरदार तैयारी के साथ उतर रही बहुजन समाज पार्टी ने सत्तारुढ़ समाजवादी पार्टी के साथ भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप जड़ा है। बसपा के राष्ट्रीय महासचिव व राज्यसभा सदस्य सतीश चंद्र मिश्रा ने आज कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली के सलोन में ब्राह्मण भाईचारा सम्मेलन के संबोधित किया।
मिश्रा ने भाजपा और सपा को एक ही सिक्के के पहलू बताते हुए आरोप लगाया कि दोनों पार्टियां समाज को आपस में लड़वाकर वोट की राजनीति करती हैं। उन्होंने कहा कि चाहे भाजपा हो, सपा हो या कांग्रेस हो, वे लोगों को आपस में लड़ाकर और भाईचारा तोड़कर वोट की राजनीति करती हैं। बसपा और इन पार्टियों के बीच यही फर्क है। हम तो भाईचारा बनाकर चलते हैं और वे तोड़कर चलते हैं।
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उन्होंने कहा कि यह किसी से छुपा नहीं है कि भाजपा और सपा एक साथ मिलकर चुनाव लड़ते हैं। एक साथ रणनीति बनाते हैं। दंगे कराकर तथा लोगों को लड़ाकर वोट की राजनीति करते हैं। सपा एक वर्ग को डराकर वोट लेती है। यही काम भाजपा भी करती है। आज उनके चेहरे बेनकाब हो गये हैं।
मिश्र ने कहा कि 2017 के चुनाव में बसपा का परचम पूरे प्रदेश में फहरेगा। एक महीने के अंदर चुनाव की घोषणा हो जाएगी। जनवरी से मार्च के बीच चुनाव होंगे। इसके लिए बसपा कार्यकर्ताओं को तैयार रहना चाहिये। उन्होंने कहा कि बसपा 'सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय' की नीति को लेकर चलती हैं। बसपा मुखिया मायावती सिर्फ कहती नहीं बल्कि उसे अमल में भी लाती हैं।
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सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा कि ईमानदारी का ढोंग करने वाली भारतीय जनता पार्टी ने अब तक मंदिर के नाम पर हजारों करोड़ रुपया जमा कर लिया। पैसा खाने के बाद अब कह रहे हैं कि मंदिर एजेंडे से बाहर है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा के नाम पर लोग एकत्र नहीं हो पा रहे हैं। यह राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के साथ हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर खट्टर को मंच पर ला रहे हैं।
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झांसी में भी मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को आना पड़ा। गुजरात में ब्राह्मण समाज की दशा खराब है। ब्राह्मण अधिकारियों को गुजरात में जेल भेजा गया है। प्रदेश से लक्ष्मीकांत वाजपेई को बेइज्जत कर प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाया गया। कानपुर से मुरली मनोहर जोशी को हरवाने की कोशिश की गई। उनको वाराणसी से हटाकर इसी कारण कानपुर से चुनाव लड़वाया गया।
