रायबरेली : नाम अमृत योजना, लेकिन नागरिकों के लिए यह विषपान जैसी है। कारण करोड़ों की इस परियोजना में कदम-कदम पर धांधली की गई। हकीकत झमाझम बारिश से सामने आ गई। देखते ही देखते मनिका रोड पर पूरी सड़क गड्ढों में तब्दील हो गई। यह ²श्य गत दिनों मुंबई की उस हादसे की याद दिला गया, जिसमें इसी तरह रोड धंसने से पूरी कार उसी में समा गई थी। इस वाक्ये से समूचे इलाके में हादसे की आशंका से खौफ है। फिलहाल, जिम्मेदारों धांधली के सबूत मिटाने के लिए मशीनों के जरिए गड्ढों में गिट्टी भरवा दी।

वर्ष 2018 में इस योजना का काम शुरू हुआ था। इसकी शुरुआत भी मनिका रोड पर सीवर लाइन डालने से हुई थी। सिविल लाइंस पुल से लेकर लखनऊ-प्रयागराज हाईवे के पुल तक सीवर लाइन बिछाई गई थी। 15 से 20 फीट तक सड़क खोदी गई थी, लेकिन जिन मानकों में दोबारा मिट्टी की भराई और सड़क का निर्माण होना चाहिए, वैसे हुआ नहीं। पिछले साल ही सड़क बनवाई गई थी। बुधवार को बारिश हुई तो सड़क की ऊपरी परत बची थी, जबकि नीचे भरी गई मिट्टी बह गई। कई जगह तो गहरे गड्ढे हो गए थे। सड़क का यह हाल देख लोगों में आक्रोश था। वह बाहर आता, इससे पहले ही जल निगम के एक्सईएन सनी सिंह, नगर मजिस्ट्रेट युगराज सिंह पहुंच गए। आनन-फानन में सड़क को फिर से खोदवाकर दोबारा मिट्टी-गिट्टी की भराई शुरू कराई।

यहां तो चल रहा कमीशन का खेल

यहां शुरू से ही योजना को लेकर मनमानी हो रही है। कहने के लिए तो प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी जल निगम के पास है। निगम ने इसका टेंडर एक अन्य नामीगिरामी कंपनी को दे रखा है। यह कंपनी भी खुद काम नहीं करा रही, बल्कि किसी और कार्यदायी संस्था को ठेका सौंपा दिया है। इसी तरह एक ही योजना पर ठेके-दर-ठेके उठाए गए हैं। सरकार से मिले बजट की एक बड़ी रकम तो सिर्फ कमीशन में चली गई। ऐसे में गुणवत्ता की उम्मीद की भी कैसे जा सकती है। खास बात यह है कि जिम्मेदार भी अपनी आंखें बंद किए बैठे रहे।

डीएम ने सुनाई खरी-खोटी

सड़क का हाल पता चलने के बाद जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव खुद भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने कार्यदायी संस्था जल निगम के एक्सईएन सनी सिंह से मामले को लेकर सवाल-जवाब किए। फिर जमकर खरी-खोटी भी सुनाई। जल्द से जल्द सड़क को दुरुस्त कराने के निर्देश दिए।