रायबरेली: जिले में 24 घंटे के भीतर रिकार्ड 251 मरीज कोरोना संक्रमित मिले हैं। इनमें से 23 जिला कारागार के बंदी हैं। न्यायालय से लौटने के बाद इनका आरटी पीसीआर टेस्ट कराया गया था, जिसकी रिपोर्ट शुक्रवार को मिली।

स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी डीएस अस्थाना ने बताया कि एनटीपीसी में तैनात सीआइएसएफ कर्मी, आइटीबीपी डलमऊ में तैनात जवान, एम्स कर्मी सहित 250 से ज्यादा लोगों की रिपोर्ट पाजिटिव आई है। इन सभी को होम आइसोलेट किया गया है। कंट्रोल रूम से लगातार इनका हाल जाना जा रहा है। नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों से इनके पास मेडिकल किट भेजी जा रही है। किसी भी मरीज की दशा गंभीर नहीं है। लोगों से अपील है कि भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें। मास्क लगाकर ही घर से निकलें। शारीरिक दूरी का पालन करें। इम्यूनिटी बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थों का ही सेवन करें। खुद जागरूक हों और दूसरों को भी जागरूक करें, ताकि संक्रमण की चेन को तोड़ा जा सके। जिले में सक्रिय केस 888 हो गए हैं। उन्होंने बताया कि करीब 40 हजार लोगों का टीकाकरण किया गया है। दूसरी डोज लगवाने में भी लोग कोताही न बरतें। वैक्सीन महामारी से बचाव में काफी कारगर साबित हो रही है।

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जिला अस्पताल में दस वर्षो से बिना लाइसेंस चल रहा ब्लड बैंक रायबरेली : जिला अस्पताल में संचालित ब्लड बैंक के लाइसेंस का रिनीवल पिछले दस वर्षों से नहीं हुआ। कंपोनेंट सेपरेटर यूनिट लगाने की बात भी सिर्फ कागजों तक ही सीमित रही। नवागत सीएमएस ने इस संबंध में विभागीय उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा है, ताकि जल्दी लाइसेंस रिनीवल हो सके।

चिकित्सीय उपचार के ²ष्टिगत ब्लड बैंक सबसे महत्वपूर्ण यूनिट है। जिला अस्पताल में 1992 के आसपास इसकी स्थापना की गई। सरकारी हो या प्राइवेट अस्पताल, रक्त के लिए इसी यूनिट से मदद मिलने लगी। प्रति वर्ष औसतन सात से नौ हजार यूनिट ब्लड का आदान-प्रदान यहां से किया जाता है। अचरज वाली बात ये है कि यहां के ब्लड बैंक का लाइसेंस तो है, लेकिन इसका रिनीवल 2012 से नहीं हुआ है। हाल ही में जिला अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक बनी डा. नीता साहू ने जब इसकी पड़ताल की तो सच सामने आ गई। डा. नीता पैथालाजी में एमडी (मास्टर आफ मेडिसिन) हैं। उन्होंने लाइसेंस रिनीवल के लिए मुख्यालय को पत्र भी भेज दिया है। जल्द लगेगी कंपोनेंट सेपरेटर यूनिट

जिला अस्पताल में जल्द ही ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर यूनिट लगेगी। इसके लिए भवन चिन्हित हो गया है। मशीनें आते ही इसके लाइसेंस के लिए भी पत्राचार किया जाएगा। कंपोनेंट सेपरेटर यूनिट लगने से मरीज को उनकी जरूरत के मुताबिक रक्त के तत्व दिए जा सकेंगे। इसके जरिए खून से प्लेटलेट्स, रेड सेल्स और प्लाज्मा को अलग करके संबंधित मरीजों को उपलब्ध कराया जाएगा। अभी डेंगू का मरीज हो या फिर दूसरी बीमारी, मरीज को पूरा ब्लड चढ़ा दिया जाता है न कि खून के कंपोनेंट। ------------------

ब्लड बैंक का लाइसेंस कई वर्षों से रिनीवल नहीं हुआ है। इसके लिए संबंधित विभाग के अफसर को पत्र भेजा गया है।

डा. नीता साहू, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक

Edited By: Jagran