रायबरेली : गरीब परिवार के बच्चे भी अब प्राइवेट स्कूलों में पढ़ सकेंगे। यह अब सपना नहीं बल्कि, हकीकत बनने जा रही है। निश्शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत उनके सपने साकार होने लगे हैं। निजी विद्यालयों में हर साल 25 प्रतिशत सीटों पर मौका दिया जा रहा है। अभिभावकों को मोटी फीस, ड्रेस और कापी-किताब खरीदने को लेकर माथापच्ची नहीं करनी पड़ती है। मंगलवार को बेसिक शिक्षा विभाग में दूसरे चरण की लाटरी कराई गई। इसमें 486 आवेदकों में से 204 को विद्यालय आवंटित किया गया। 11 आवेदन निरस्त कर दिए गए। 271 द्वारा मांगे गए विद्यालय में सीट फुल होने के कारण मौका नहीं मिल सका। उन्हें विद्यालय नहीं आवंटित किया गया। तीसरे चरण को लेकर बढ़ी दुविधा

निश्शुल्क शिक्षा दिलाने के लिए अधिक से अधिक अभिभावकों को लाभ पहुंचाने की कोशिश होती है। यही वजह है कि हर साल तीन चरण में चयन प्रक्रिया को पूरा किया जाता है। इस बार भी पहले तीन चरण की तिथियां पहले से निर्धारित कर दी गई थीं। कोरोना महामारी के कारण तिथियों में परिवर्तन करते हुए तीसरे चरण की तिथि में शामिल कर दिया गया। जिला समन्वयक सामुदायिक सहभागिता संजीव गुप्ता ने बताया कि तीसरे चरण को लेकर शासन से अब तक कोई निर्देश नहीं मिला है।

इनसेट

दूसरे चरण की लाटरी पर एक नजर

358- प्राइवेट विद्यालय

84- शहरी क्षेत्र के विद्यालय

486 - आवेदन

475 - पात्र

11- आवेदन निरस्त

204- लाटरी में चयनित

271- नहीं मिला स्कूल

पहले चरण की स्थिति

862- आवेदन

84 - आवेदन निरस्त

619- लाटरी में चयनित

193- नहीं मिला स्कूल इनकी सुनें

बच्चों को बेहतर शिक्षा मिले। इसके लिए पूरा प्रयास किया जा रहा है। निश्शुल्क शिक्षा के लिए लाटरी प्रक्रिया पूरी हो गई है। जल्द ही सभी को प्रवेश के लिए पत्र भी जारी कर दिया जाएगा।

आनंद प्रकाश शर्मा, बीएसए

Edited By: Jagran