रायबरेली: ठंड से गर्मी में बदल रहे मौसम से शिशुओं में डायरिया का खतरा बढ़ गया है। दस्त और उल्टी से परेशान बच्चों की अस्पतालों में भीड़ बढ़ रही है।

जिला अस्पताल में शुक्रवार को राही के बेलाखारा से हिमांशू (5) पुत्र दुलारे व दीपांजलि (2) पुत्री धर्मेंद्र, सतांव के सुल्तानपुर खेड़ा से पायल (10) पुत्री रज्जन, प्रतापगढ़ के राजापुर, उदयपुर से निशा (8 माह) पुत्री लाला, लालगंज के रघुनाथ खेड़ा से आयुष (2) पुत्र जगदेव, शहर के अंदरुन किलान से नाहिदा (1) पुत्री नियाज, महराजगंज के मऊगर्वी से तान्या (2) पुत्री रामकुमार, ऊंचाहार से संतलाल (3) पुत्र राम दुलारे को डायरिया होने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके अलावा लगभग एक सैकड़ा शिशुओं को दवाएं व परहेज बताकर घर भेजा गया।

डायरिया होने की मुख्य वजहें

दस्त होने का कारण रोटा वायरस विषाणु है। रोटा वायरस अंतड़ियों को संक्रमित करता है, जिससे गैस्ट्रोएंटेराइटिस होता है। यह आंत की अंदरूनी परत को क्षति पहुंचाता है। इस क्षतिग्रस्त परत से तरल पदार्थ का रिसाव होता है और पोषक तत्वों का समाहन किए बिना भोजन इसमें से निकल जाता है। अधिकांश बच्चे पांच साल के होने से पहले कई बार इस विषाणु से प्रभावित होते हैं। छह से 24 माह की उम्र वाले बच्चों को इस विषाणु से इंफेक्शन का खतरा ज्यादा होता है। जब शिशु घुटनों के बल चलना शुरु कर देते हैं तो उनके लिए साफ सफाई बनाए रखना मुश्किल हो जाता है।अशुद्ध पेयजल मुख्य वजह है। साथ ही फार्मूला दूध में सही अनुपात में पानी न मिलाने पर, सर्दी-जुकाम होने पर और विषाक्त या बासी भोजन करने पर इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।

डायरिया के लक्षण

शिशु को डायरिया होने पर उसकी त्वचा या होंठ रुखे हो जाते हैं। शरीर सुस्त हो जाता है और आंखों से लगातार पानी बहता रहता है। हाथों और पैरों की रंगत फीकी होने लगती है। अगर शिशु पानी, दूध या कोई भी अन्य तरल पदार्थ नहीं ले रहा, 24 घंटे से ज्यादा समय तक बुखार है, मल में खून आ रहा है, दस्त के साथ उल्टी भी हो रही है, पेट में सूजन है तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें।

डायरिया का घरेलू उपचार

शिशु को अधिक मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन कराएं ताकि शरीर में पानी की कमी न हो सके। अगर शिशु उचित मात्रा में स्तनपान या फॉर्मूला दूध पी रहा है तो इसे जारी रखें। घर पर उबालकर ठंडा किए गए एक लीटर पानी में आठ छोटी चम्मम चीनी और एक छोटी चम्मच नमक मिला कर घोल तैयार कर लें। शिशु जब भी उल्टी या मल त्याग करे तो उसे घोल की कुछ घूंट पिला दें।

पिलाये ओरआरएस का घोल

बड़े शिशुओं को बीच-बीच में ओआरएस (ओरल रिहाइड्रेशन सोल्यूशन) या इलेक्ट्राल घोल के पिलाएं। नारियल पानी इलेक्ट्रोलाइट्स का एक अच्छा स्त्रोत है। नौ माह की उम्र से बड़े शिशुओं को फलों के रस में पानी मिलाकर भी दिया जा सकता है। शिशुओं के लिए एक हिस्से जूस में 10 हिस्से पानी मिलाकर देना सही रहता है।

चिकित्सीय परामर्श जरूरी

गर्मी आते ही डायरिया का खतरा बढ़ जाता है। खासतौर पर बच्चे इस बीमारी की जद में जल्दी आ जाते हैं। कारण साफ सफाई का अभाव और अशुद्ध पानी ही होता है। 12 साल से कम उम्र के बच्चों को एंटी डायरियल दवाएं नहीं देनी चाहिए। इन दवाओं के गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं। डॉक्टर से बिना पूछे शिशु को जड़ी बूटी, हर्बल वाली औषधि या उपचार भी न दें। नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र जाकर चिकित्सक से परामर्श पर ही इलाज कराएं।

डॉ एएस गौतम, बाल रोग विशेषज्ञ जिला चिकित्सालय

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