कुलदीप गुप्ता, रायबरेली : सुप्रीम कोर्ट की ओर से आधार कार्ड को प्राथमिकता न दिए जाने के बाद भी भारत और राज्य सरकार ने जननी सुरक्षा लाभार्थी के भुगतान के लिए आधार कार्ड जरूरी कर दिया है। इसके लिए प्रदेश के 6 जनपदों को चयनित किया गया हैं। इसमें रायबरेली का चयन किया गया है। राज्य स्तर पर लगभग 20-25 प्रतिशत प्रसव प्राइवेट नर्सिग होमों में हुए है। इसको देखते हुए शासन ने प्राइवेट नर्सिग होमों पर प्रसव कराने की व्यवस्था करने जा रही है।

प्रदेश में मातृ मृत्यु दर एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत ''जननी सुरक्षा योजना'' संचालित की जा रही है। जननी सुरक्षा योजना को आधार इनबेल्ड पेमेंट सिस्टम (एईपीएस) से संबद्ध किए जाने के लिए भारत सरकार एवं राज्य सरकार की ओर से छह जनपदों का चयन किया गया है। चयनित जनपदों में जननी सुरक्षा योजना के लाभार्थियों का भुगतान आधार इनबेल्ड पेमेंट सिस्टम (एईपीएस) के माध्यम किए जाने का निर्देश दिया गया है। पिछले दो वित्तीय वर्षो में जननी सुरक्षा योजना की वार्षिक उपलब्धि में निरंतर गिरावट दर्ज की जा रही है। इसके लिए जनपद में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए सरकारी भवनों में स्थापित कुल उपकेंद्रों में न्यूनतम 50 प्रतिशत को मान्यता भी प्रदान किया जायेगा। ऐसे सभी उपकेंद्र जहां की एएनएम प्रसव कराने में कुशल एवं जहां पहले से भी प्रसव हो रहे हो, लेकिन प्रसूताओं को जननी सुरक्षा योजना का लाभ न मिल पा रहा हो। उनकों प्राथमिकता से चिन्हित कर उन केंद्रों पर जननी सुरक्षा योजना का लाभ प्रदान किया जायेगा। जिले के अधिक से अधिक उपकेंद्रों को जननी सुरक्षा योजना को अधिकृत एवं क्रियाशील किया जाएगा। इसके लिए प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण ने जननी सुरक्षा योजना के लाभार्थियों को आधार कार्ड अनिवार्य कर दिया है। जिससे योजना का सही तरीके से क्रियान्वयन हो सके।

इनकी सुनें

जननी सुरक्षा योजना की लाभार्थियों को आधार कार्ड से जोड़ने के निर्देश मिले है। सभी लाभार्थियों को योजना का सही लाभ मिले इसका मुख्य उद्देश्य है।

डॉ एके गुप्ता, सीएमओ, रायबरेली।

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