'सीलिंग सीमा से अधिक जमीन का बैनामा अमान्य', इलाहाबाद हाई कोर्ट का बड़ा फैसला; किरायेदार की बेदखली बरकरार
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अर्बन लैंड सीलिंग के तहत 1500 वर्ग मीटर से अधिक जमीन के बैनामे को अमान्य घोषित ...और पढ़ें
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हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: सीलिंग से अधिक जमीन का बैनामा अमान्य,
HighLights
सीलिंग सीमा से अधिक जमीन का बैनामा अमान्य घोषित।
1500 वर्ग मीटर तक का बैनामा ही वैध माना जाएगा।
किरायेदारी विवाद में बेदखली का आदेश बरकरार रखा।
विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अर्बन लैंड सीलिंग के तहत आने वाली जमीन की 1983 में हुई रजिस्ट्री को आंशिक रूप से शून्य घोषित किया है। कोर्ट ने कहा कि सीलिंग सीमा से अधिक जमीन का बैनामा नहीं हो सकता। इस मामले में 1500 वर्ग मीटर तक का बैनामा वैध है।
न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति सुधांशु चौहान की खंडपीठ ने सीता देवी व अन्य की याचिका पर यह आदेश दिया। विवाद ग्राम दांदूपुर परगना अरैल, तहसील करछना, जिला प्रयागराज स्थित प्लाट नंबर 249 की 4,980 वर्ग मीटर जमीन से जुड़ा है।
याचियों के अनुसार उन्होंने पांच जनवरी 1983 को सक्षम प्राधिकारी से अनुमति लेकर 22 फरवरी 1983 को मूल भू-स्वामी विमल प्रसाद से रजिस्टर्ड बैनामा कराया। 13 मार्च 1987 को राजस्व रिकार्ड में नाम दर्ज हुआ और उन्होंने मकान बनाकर रहना शुरू किया। पांच फरवरी 2011 को उन्हें पता चला कि जमीन अर्बन सीलिंग में दर्ज है। विमल प्रसाद ने 1976 में सीलिंग रिटर्न दाखिल किया था।
दो महीने में होगा पैमाइश
29 जनवरी 1982 को धारा 8(4) के तहत 21,956.95 वर्ग मीटर जमीन सरप्लस घोषित की गई थी, जिसमें विवादित जमीन भी थी। कोर्ट ने कहा कि 1500 वर्ग मीटर से अधिक, यानी शेष 3,480 वर्ग मीटर का बैनामा शून्य है और याचियों का उस पर कोई हक नहीं है।
याचियों को एक माह में सक्षम प्राधिकारी के समक्ष 1500 वर्ग मीटर के सीमांकन का प्रत्यावेदन देना होगा। प्राधिकारी दो माह में पैमाइश करेगा। इसके बाद राजस्व रिकार्ड में सुधार के लिए जिलाधिकारी के समक्ष आवेदन किया जा सकेगा। पक्षकार चार माह तक या सीमांकन पूरा होने तक यथास्थिति बनाए रखेंगे।
