चुनावी सरगर्मी से प्रयागराज-कौशांबी में बढ़ी ऊन की मांग, सरकारी विभाग और संस्थाओं होती है कंबलों की सप्लाई
प्रयागराज और कौशांबी में आगामी विधानसभा चुनावों के कारण ऊन की मांग में तीन गुना वृद्धि हुई है, जिससे कंबल वितरण और उत्पादन में तेजी आई है।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
प्रयागराज-कौशांबी में सालाना एक हजार कुंतल ऊन का उत्पादन।
चुनावी सरगर्मी ने ऊन की मांग को तीन गुना बढ़ाया है।
गाजा मिल में ऊन से धागा, फिर कंबल फैक्ट्रियों को आपूर्ति।
सूर्यप्रकाश तिवारी, प्रयागराज। सर्दी के दौरान बड़े पैमाने पर गरीबों में कंबल का वितरण होता है। प्रयागराज में प्रशासन ही 10 लाख कंबल बांट देता है। जनप्रतिनिधि भी अपने वाहनों में कंबलों की गठरी लिए बिना नहीं चलते। इस बार सर्दी से पहले विधानसभा चुनाव की सरगर्मी ने माहौल बना दिया है। इस सरगर्मी ने कंबल वाले ऊन की मांग करीब तीन गुना तक बढ़ा दी है।
प्रयागराज और कौशांबी के करीब 300 पशुपालकों ने लगभग 2,14,000 भेड़ पाल रखी है। इनसे हर साल लगभग एक हजार कुंतल ऊन का उत्पादन होता है। यह ऊन सबसे पहले पीपलगांव के गाजा स्थित खादी ग्रामोद्योग के प्लांट में जाता है। यहां ऊन से धागा बनाया जाता है।
फिर यही धागा मीरजापुर, भदोही, गोरखपुर सहित प्रदेश के दूसरे जिलों में स्थित फैक्ट्रियों में जाता है, जहां धागे से कंबल बनाए जाते हैं। इन कंबलों की ज्यादातर आपूर्ति सरकारी विभाग और संस्थाओं में होती है।
साल में दो बार निकलता है ऊन
सघन भेड़ एवं ऊन प्रसार केंद्र के मुख्य तकनीकी अधिकारी पंकज कुमार बताते हैं कि साल में दो बार भेड़ों के शरीर से ऊन निकाला जाता है। एक बार फरवरी तो दूसरी बार अक्टूबर में। इन दोनों ही सीजन में ऊन की आपूर्ति प्लांट में होती है। फरवरी-2025 में प्लांट से सिर्फ 30 कुंतल ऊन की मांग हुई थी।
इसके बाद अगले दो सीजन में कोई डिमांड नहीं आई। अब इस बार अक्टूबर के लिए 100 क्विंटल की डिमांड प्लांट से आई है। इस व्यवसाय से जुड़े लोगों का मानना है कि विधानसभा चुनाव के कारण मांग एकाएक बढ़ गई है, क्योंकि चुनाव के पहले जनप्रतिनिधि बड़े पैमाने पर सर्दी में कंबलों का वितरण करेंगे। बाजार की अपेक्षा यह कंबल सस्ते पड़ते हैं। इसलिए, इनकी मांग अधिक रहती है।
सफेद ऊन का दाम 32 और पीला बिकता 27 रुपये प्रति किलो
भेड़ों से निकलने वाले सफेद रंग के ऊन का प्लांट में दाम 32 रुपये और पीले रंग के ऊन का दाम 27 रुपये प्रति किलोग्राम रहता है। काले रंग के ऊन की खरीद प्लांट में होती ही नहीं। वहीं खुले बाजार में व्यापारी सफेद और पीले ऊन का 10 से 12 रुपये प्रतिकिलो दाम लगाते हैं।
सिर्फ छह जिलों में है इकाईयां
शासन की ओर से प्रदेश के सिर्फ छह जिलों में सघन भेड़ एवं ऊन प्रसार केंद्र बनाए गए हैं। इनमें प्रयागराज और कौशांबी के अलावा मीरजापुर, भदोही, वाराणसी और चंदौली शामिल हैं। प्रयागराज में 1,86,000 तो कौशांबी में 28000 भेड़ पाली गईं हैं।
