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Prayagraj : विधि विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर डॉ. दीपक शर्मा विवादों के बीच निलंबित, स्टेशन छोड़ने पर रोक

By Mritunjay Mishra Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Sat, 03 Oct 2026 09:02 PM (IST)

डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, प्रयागराज के सहायक प्रोफेसर डॉ. दीपक शर्मा को गोपनीय दस्तावेज मिलने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है।

डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (आरपीएनएलयू) प्रयागराज।

डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (आरपीएनएलयू) प्रयागराज।

HighLights

  1. रोज रिसेप्शन काउंटर पर प्रतिदिन उपस्थिति दर्ज करानी होगी, प्रशासनिक संकट गहराया

  2. 12 असिस्टेंट प्रोफेसरों के चयन एवं नियुक्ति से जुड़े दस्तावेज लैपटाप से मिलने का प्रकरण

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (आरपीएनएलयू) प्रयागराज में 12 सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति के बाद खड़े हुए प्रशासनिक विवाद के बीच सहायक प्रोफेसर व हेड (विधि) डॉ. दीपक शर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

उनके लैपटाप से विश्वविद्यालय की नियुक्ति प्रक्रियाओं से जुड़े गोपनीय दस्तावेज मिलने के मामले में यह कार्रवाई की गई। वहीं कुलपति और कुलसचिव के बीच चल रहा विवाद भी शासन तक पहुंच गया है। कुलपति प्रो. उषा टंडन ने अपर मुख्य सचिव, नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग से हस्तक्षेप की मांग की है।

विश्वविद्यालय की कार्यवाहक कुलसचिव की ओर से जारी आदेश के अनुसार डॉ. शर्मा के खिलाफ मिली शिकायतों और उपलब्ध सामग्री के आधार पर 31 अगस्त को तथ्य-जांच समिति गठित की गई थी। फोरेंसिक जांच में उनके लैपटाप से विश्वविद्यालय की गोपनीय सामग्री से संबंधित चार दस्तावेज मिलने की बात सामने आई।

इनमें 12 असिस्टेंट प्रोफेसरों के चयन एवं नियुक्ति से जुड़े दस्तावेज तथा एक असिस्टेंट रजिस्ट्रार की नियुक्ति से संबंधित संचार शामिल बताया गया है। इसके बाद शर्मा को कारण बताओ नोटिस जारी कर एक अक्टूबर तक जवाब देने को कहा गया था। हालांकि दो दिन के अतिरिक्त समय के बाद भी जवाब नहीं मिलने र निलंबन की कार्रवाई की।

आदेश में पद के दुरुपयोग, उत्पीड़न, कदाचार, गोपनीय सूचनाओं के कथित खुलासे और आधिकारिक कार्यों में हस्तक्षेप जैसे आरोपों का भी उल्लेख है। निलंबन अवधि में डॉ. शर्मा को विश्वविद्यालय के विभागों, छात्रावासों, अभिलेखों, इलेक्ट्रानिक सिस्टम और डेटाबेस तक पहुंच नहीं होगी। उन्हें प्रतिदिन उपस्थिति दर्ज करनी होगी। मुख्यालय छोड़ने पर रोक रहेगी।

मुझे 316 पेज के नोटिस में 49 प्रश्न पूछे गए थे। जवाब देने के लिए 15 दिन का समय मांगा था। यूपी सिविल सर्वेंट नियमावली 1999 के अनुसार न्यूनतम 15 दिन और अधिकतम 21 दिन का समय दिया जाना चाहिए पर मुझे पांच दिन का दिया है। मैं चिकित्सकीय अवकाश पर हूं। 12 शिक्षकों की नियुक्ति प्रकरण में हुई अनियमितता की जानकारी शासन द्वारा बनाई गई समिति को देने पर मुझे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।
- डॉ. दीपक शर्मा, सहायक प्रोफेसर व हेड, आरपीएनएलयू

कुलपति-कुलसचिव विवाद शासन तक

इधर कुलपति प्रो. उषा टंडन ने कुलसचिव वरुण कुमार पांडेय पर प्रशासनिक निर्देशों का अनुपालन नहीं करने और सहयोग न करने का आरोप लगाते हुए अपर मुख्य सचिव को पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है। पत्र में कुलपति ने कहा है कि कुलसचिव के अवकाश के दौरान उनका कार्यभार परीक्षा नियंत्रक को सौंपा गया, लेकिन कार्यालय की चाबी अधिकृत अधिकारी को नहीं सौंपी गई। कुलपति ने 30 सितंबर के पत्र में कार्यालय की चाबी सहायक रजिस्ट्रार या अधिकृत अधिकारी को सौंपने तथा आधिकारिक ई-मेल और डिजिटल अभिलेखों तक निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था।

कुलसचिव ने अवकाश का अनुरोध किया 

दूसरी ओर कुलसचिव ने 26 सितंबर के कारण बताओ नोटिस का जवाब देने के लिए 14 दिन के चिकित्सा अवकाश का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि प्रत्येक आरोप का तथ्यात्मक जवाब देने के लिए संबंधित अभिलेखों का अध्ययन जरूरी है और वे ड्यूटी पर लौटने के बाद विस्तृत जवाब देंगे। इस बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट के दो मौजूदा न्यायाधीश रविवार को विश्वविद्यालय के दौरे पर रहेंगे।