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CM योगी की नाराजगी के बाद राम वनगमन पथ की खामियों की होगी जांच, कई इंजीनियर कार्रवाई की जद में

Published: Sun, 13 Sep 2026 08:01 AM (IST)

राम वनगमन पथ पर निर्माण के तुरंत बाद आई दरारों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गंभीर नाराजगी जताई है।

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HighLights

  1. राम वनगमन पथ पर निर्माण के बाद दिखीं बड़ी दरारें।

  2. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले पर जताई गंभीर नाराजगी।

  3. सड़क की गुणवत्ता और अधिकारियों की भूमिका की होगी गोपनीय जांच।

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। अयोध्या को चित्रकूट से जोड़ने वाले राम वनगमन पथ पर निर्माण के कुछ समय बाद ही पड़ी बड़ी दरारों ने सड़क की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मामले को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गंभीरता से लेते हुए नाराजगी जताई है। उनके निर्देश पर कई अफसरों के साथ ही फर्म के खिलाफ कार्रवाई शनिवार को गई है। अब सड़क क्षतिग्रस्त होने के कारणों की गोपनीय जांच भी कराने की तैयारी की जा रही है। जांच में निर्माण की गुणवत्ता, निगरानी और अधिकारियों की भूमिका को भी परखा जाएगा। सूत्रों के अनुसार, जांच की जद में 10 से अधिक अभियंताओं के आने की संभावना है।

राम वनगमन पथ के दूसरे पैकेज में प्रतापगढ़ के अवतारपुर से प्रयागराज के श्रृंगवेरपुर तक 14 किलोमीटर से अधिक मार्ग का निर्माण करीब 407 करोड़ रुपये की लागत से कराया गया है। निर्माण पूरा होने के कुछ समय बाद ही लखनऊ राजमार्ग के क्रास प्पाइंट से श्रृंगवेरपुर धाम स्थित गंगा पुल तक करीब 350 मीटर से अधिक हिस्से में बड़ी दरारें दिखाई देने लगीं।

निर्माण से जुड़े अधिकारियों की भूमिका भी सामने आने की उम्मीद

जबकि दो किलोमीटर के दायरे में अलग-अलग स्थानों पर दरार है। आरई वाल भी दरकी हुई है। इससे निर्माण में इस्तेमाल सामग्री और तकनीकी गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे। मार्ग क्षतिग्रस्त होने के बाद पीडब्ल्यूडी राष्ट्रीय मार्ग के मुख्य अभियंता एके जैन ने आठ सितंबर को नई दिल्ली की निर्माण फर्म एसएंडपी इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपर्स और स्वतंत्र अभियंता एलएन मालवीय इन्फ्रा प्रोजेक्ट को डिबार करने के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (मोर्थ) को पत्र भेजा था।

इसके साथ ही पीडब्ल्यूडी राष्ट्रीय मार्ग, प्रयागराज के अधीक्षण अभियंता ओंकार भारतीय और अधिशासी अभियंता रवींद्र पाल सिंह के निलंबन की संस्तुति की गई। इन सभी पर कार्रवाई हो गई। मुख्यमंत्री की नाराजगी के बाद अब गोपनीय जांच में निर्माण से जुड़े अन्य अधिकारियों की भूमिका भी सामने आने की उम्मीद है।

जांच में यह देखा जाएगा कि निर्माण के दौरान गुणवत्ता मानकों का कितना पालन हुआ और विभागीय स्तर पर निरीक्षण व निगरानी में कोई लापरवाही तो नहीं हुई। उधर, दरार वाले हिस्से की मरम्मत कार्यदायी संस्था की ओर से शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि मरम्मतीकरण का काम तीन से चार दिन में पूरा कर लिया जाएगा।

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