राधा अष्टमी: शुभ मुहूर्त में पूजन विधि से मनाएं जन्मोत्सव, पुण्य प्राप्ति को व्रती श्रद्धालु इन मंत्रों का करें जाप
राधा अष्टमी का जन्मोत्सव 19 सितंबर को आयुष्मान और बुधादित्य योग के शुभ संयोग में मनाया जाएगा। इस दिन राधारानी ...और पढ़ें

राधा अष्टमी 19 सितंबर को मनाई जाएगी।
HighLights
आयुष्मान योग, बुधादित्य संयोग में 19 सितंबर को मनेगा राधारानी का जन्मोत्सव
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तरह राधा अष्टमी का विशेष महत्व: आचार्य देवेंद्र त्रिपाठी
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। भगवान श्रीकृष्ण की प्रिया राधारानी का जन्मोत्सव भाद्रपद शुक्लपक्ष की अष्टमी तिथि 19 सितंबर को मनाया जाएगा। आयुष्मान योग और बुधादित्य के अद्भुत संयोग में मठ-मंदिरों में मंत्रोच्चार के बीच श्रीराधा का अभिषेक व पूजन किया जाएगा।
56 भोग अर्पित करके प्रसाद स्वरूप ग्रहण करें
भक्त आरती करके कीर्तन के जरिए राधा-कृष्ण की महिमा बखानेंगे। उन्हें 56 भोग अर्पित करके प्रसाद स्वरूप उसे ग्रहण करेंगे। श्रीरूप गौड़ीय मठ, राधा-कृष्ण मंदिर, श्री निंबार्क आश्रम, इस्कान सहित तमाम मंदिरों में राधा अष्टमी का पर्व श्रद्धा से मनाया जाएगा।
दोपहर 12 से 2.19 बजे के मध्य मनाना उत्तम
ज्योतिर्विद आचार्य देवेंद्र प्रसाद त्रिपाठी के अनुसार अष्टमी तिथि 18 सितंबर की दोपहर 12.16 बजे लग जाएगी, जो शनिवार 19 सितंबर को दोपहर 2.19 बजे तक रहेगी। आयुष्मान योग के साथ सूर्य व बुध ग्रह के कन्या राशि में संचरण करने से बुधादित्य का अद्भुत संयोग बनना अत्यंत पुण्यकारी है। राधारानी का जन्मोत्सव शनिवार दोपहर 12 से 2.19 बजे के मध्य मनाना उत्तम रहेगा।
राधा अष्टमी से 15 दिवसीय महालक्ष्मी व्रत आरंभ होगा
आचार्य देवेंद्र के अनुसार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तरह राधा अष्टमी का विशेष महत्व है। राधा अष्टमी से 15 दिवसीय महालक्ष्मी का व्रत आरंभ हो जाएगा। यह व्रत रखने वालों को समस्त पापों से मुक्ति मिलती है। विवाहित महिला संतान सुख और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए राधा अष्टमी का व्रत रखती हैं।

कमलयंत्र बनाकर करें पूजा और जप : डॉ. अमिताभ
ज्योतिषाचार्य डॉ. अमिताभ गौड़ के अनुसार श्रीराधा-कृष्ण जिनके इष्टदेव हैं, उन्हें राधाष्टमी का व्रत अवश्य करना चाहिए। श्रीराधा जी सर्वतीर्थमयी व ऐश्वर्यमयी हैं। इनके भक्तों के घर में सदा लक्ष्मी का वास रहता है। श्रीराधा अष्टमी की सुबह सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नानादि क्रियाओं से निवृत होकर श्रीराधा का विधिवत पूजन करना चाहिए।
इन मंत्रों का करें जप
उन्होंने बताया कि श्रीराधा-कृष्ण मंदिर में ध्वजा, पुष्पमाला, वस्त्र, पताका, तोरण, मिष्ठान व फल अर्पित करके श्रीराधा की स्तुति करनी चाहिए। घर अथवा मंदिर में पांच रंगों से मंडप सजाएं। इसके भीतर कमलयंत्र बनाएं, उस कमल के मध्य में दिव्य आसन पर श्रीराधा-कृष्ण की युगलमूर्ति पश्चिमाभिमुख करके स्थापित करके पूजन करना चाहिए। पूजन में ऊं श्री राधिकायै नम: अथवा श्री राधा विजयते नम:, श्रीराधाकृष्णाय नम: में से किसी एक का 108 बार जप जरूर करना चाहिए।
राधा अष्टमी पर इन बातों करें पालन
-मांस, मदिरा, लहसुन व प्याज का सेवन न करें।
-क्रोध, दूसरों की निंदा, किसी के प्रति अपशब्द का प्रयोग न करें।
-मन, वचन और कर्म की शुद्धता का विशेष ध्यान रखें।
-अपनी क्षमता के अनुसार निराहार या फलाहार रहकर पूजन करें।
-दिनभर मन में श्रीराधा नाम का स्मरण करते रहें।
-स्वास्थ्य खराब है तो सात्विक भोजन कर सकते हैं।
-यथासंभव गरीबों को दान देना चाहिए।
-गोशाला में जाकर गऊ सेवा करना पुण्यकारी होता है।
