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सात वर्षीय बच्चे के दिल में जन्मजात छेद बिना चीरा लगाए बंद किया, प्रयागराज के डॉक्टरों को मिली कामयाबी

By Amerdeep Bhatt Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Tue, 17 Feb 2026 04:35 PM (IST)

प्रयागराज के एसआरएन हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने सात वर्षीय बच्चे के दिल में जन्मजात छेद को बिना चीरा लगाए डिवाइस ...और पढ़ें

बच्चे के दिल के जन्मजात छेद को बंद करने में जुटे प्रयागराज के एसआरएन हॉस्पिटल के चिकित्सकों की टीम। सौजन्य : स्वयं

बच्चे के दिल के जन्मजात छेद को बंद करने में जुटे प्रयागराज के एसआरएन हॉस्पिटल के चिकित्सकों की टीम। सौजन्य : स्वयं 

HighLights

  1. एसआरएन हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने डिवाइस क्लोजर तकनीक का किया प्रयोग

  2. अब दिल्ली और लखनऊ जाने की जरूरत नहीं, संगम नगरी में भी इलाज संभव 

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। बच्चों के दिल में जन्मजात छेद (एएसडी) का पता चलने पर माता-पिता की रातों की नींद उड़ जाती है। उसे बंद कराने में बड़ी रकम खर्च होती है और आमतौर पर पीड़ित बच्चे को लखनऊ या दिल्ली ले जाना पड़ता है।

बच्चे के दिल में 14 मिमी आकार का था छेद 

हालांकि प्रयागराज के स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय (एसआरएन हॉस्पिटल) ने इस दिशा में सफल कदम बढ़ाया है। अस्पताल में सात वर्षीय एक बच्चे देवांश साहू के दिल में 14 मिमी के आकार का जन्मजात छेद डिवाइस क्लोजर तकनीक से डॉक्टरों ने बंद किया गया। यह आपरेशन बिना चीरा लगाए हुआ।

खेलते या दौड़ते समय जल्दी थक जाता था

अस्पताल में कुछ दिनों पहले देवांश को लेकर पहुंचे स्वजन ने बताया था कि बच्चे की शारीरिक वृद्धि सामान्य रूप से नहीं हो पा रही है। खेलते समय या दौड़ने पर जल्दी थक जाता है। बार-बार निमोनिया होने की समस्या बताई गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर हृदय रोग विशेषज्ञ डाॅ. वैभव श्रीवास्तव, डाॅ. ऋषिका पटेल, डाॅ. विमल निषाद, एनेस्थीसिया विभाग के डाॅ. अनिल कुमार सिंह ने संयुक्त रूप से इंटरवेंशनल डिवाइस क्लोजर प्रक्रिया से छेद को बंद कर दिया।

समय पर इलाज न होने पर बढ़ती हैं जटिलताएं 

डाॅ. ऋषिका ने बताया कि इस तरह की परेशानी में इलाज समय पर न किया जाए तो हार्ट फेल हो सकता है या सायनोसिस (नीलिमा) जैसी जटिलताएं हो सकती हैं। सायनोसिस होने पर आक्सीजन की कमी हो जाती है। त्वचा और होंठ नीले पड़ने लगते हैं।

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