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मनुस्मृति पर राहुल गांधी की टिप्पणी से धर्माचार्यों में रोष, भ्रांतियां दूर करने में जुटे संत

Published: Wed, 26 Aug 2026 01:17 AM (GMT+05:30)

राहुल गांधी के मनुस्मृति पर बयान से प्रयागराज के धर्माचार्य नाराज हैं और वे श्रद्धालुओं से संवाद कर भ्रांतियां दूर कर रहे हैं।

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HighLights

  1. राहुल गांधी के मनुस्मृति बयान पर धर्माचार्य नाराज।

  2. प्रयागराज के मठ-मंदिरों में मनुस्मृति पर संवाद।

  3. धर्माचार्य बोले, मनुस्मृति नारी सम्मान की बात करती है।

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। मनुस्मृति ग्रंथ अक्सर चर्चा में रहता है। ऋषि मनु द्वारा रचित इस ग्रंथ की बातों का कोई विरोध करता है, तो कई वर्ग समर्थन में खड़े हो जाते हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बीते दिनों पुणे में हुए ''छात्रों की गूंज'' कार्यक्रम में मनुस्मृति का उल्लेख करके उसे चर्चा में ला दिया है। उन्होंने कहा, ''महिलाओं को दबाने का माइंडसेट मनुस्मृति से आता है।''

संगमनगरी के धर्माचार्य राहुल के बयान को अशोभनीय बताते हुए उससे जुड़ी भ्रांति दूर करने को संवाद शुरू किया है। श्रीमनकामेश्वर महादेव मंदिर, मां आलोपशंकरी मंदिर, कैवल्य धाम आश्रम, श्रीमहानिर्वाणी अखाड़ा के धर्माचार्य मनुस्मृति का भाव समझा रहे हैं। इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्मों फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स पर मनुस्मृति से जुड़ी पोस्ट साझा किए जा रहे हैं।

श्रीमनकामेश्वर महादेव मंदिर के महांत व द्वारका शारदा पीठ के प्रतिनिधि श्रीधरानंद ब्रह्मचारी ने सुबह 10 से 11 और शाम को पांच से सात बजे तक धार्मिक संवाद शुरू किया है। वह श्रद्धालुओं को मनुस्मृति सहित समस्त वेद-पुराण से जुड़े प्रश्न पूछने को कहते हैं। फिर उसका भाव समझाते हैं।

श्रीधरानंद कहते हैं-इधर मनुस्मृति की बातों को लेकर लोगों में भ्रांति बढ़ी है। उसे महिला विरोधी बताते हैं, जबकि मनुस्मृति में नारी के सम्मान की बात कही गई है। उसमें लिखा है-''जिस कुल में बहू-बेटियां क्लेश भोगती हैं वह कुल शीघ्र नष्ट हो जाता है। जहां वो सुखी रहती हैं वह कुल सर्वदा बढ़ता है।'' वर्ण व्यवस्था भी लोगों को जोड़ने के लिए बनी है।

नेता राजनीतिक लाभ को मनुस्मृति और श्रीरामचरितमानस के भाव को बदलकर लोगों को गुमराह करते हैं। ऐसे कृत्य के विरोध में इंटरनेट मीडिया के प्लेटफार्मों पर पोस्ट साझा किए जा रहे हैं।

श्रीमहानिर्वाणी अखाड़ा के सचिव श्रीमहांत यमुना पुरी राहुल गांधी के बयान से अचंभित हैं। वह आश्रम में आने वाले श्रद्धालुओं की भ्रांति दूर करने में जुटे हैं। कहते हैं राजनीतिक प्रयोग के लिए क्या सिर्फ सनातन धर्म है?

खुद को ब्राह्मण और सनातनी कहने वाला व्यक्ति मनुस्मृति की गलत व्याख्या कैसे कर सकता है? वह कहते हैं ऋषि मनु ने समाज को एकता के सूत्र में पिरोने के लिए मनुस्मृति की रचना की है। मनुस्मृति में नारी के सम्मान की बात है अपमान की नहीं।

शरिया के समर्थक बदल रहे मनुस्मृति का भाव: रवींद्र पुरी

मां मनसादेवी मंदिर व अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहांत रवींद्र पुरी ने राहुल गांधी के बयान को निंदनीय बताया। कहा, शरिया के समर्थक मनुस्मृति का भाव बदलकर लोगों को गुमराह कर रहे हैं।

मनुस्मृति को राजनीतिक लाभ के लिए विवादित करना अशोभनीय है। हम इसे स्वीकार नहीं करेंगे। मनु स्मृति के सही भाव को लोगों को बताया जा रहा है। समस्त कथावाचकों से आग्रह किया गया है कि प्रवचन के दौरान वह श्रद्धालुओं के समक्ष मनुस्मृति की सही व्याख्या जरूर करें।

राहुल अध्याय-3 का करें अध्ययन: डाॅ. बिपिन

फेसबुक, एक्स पर मनुस्मृति से जुड़े पोस्ट साझा करने वाले विश्व पुरोहित परिषद के अध्यक्ष डा. बिपिन पांडेय कहते हैं कांग्रेस नेता राहुल गांधी को मनुस्मृति के अध्याय-3 का अध्ययन करना चाहिए।

उसमें लिखा है-''जहां नारी का सम्मान होता है वहां देवता प्रसन्न होते हैं। जहां नारी का अपमान होता है वहां शुभ कार्य निष्फल हो जाते हैं।'' ऐसे में कोई नारी का अपमान क्यों करेगा? ऐसे पवित्र ग्रंथ के बारे में अनर्गल बातें करना निंदनीय है।